वाशिंगटन, 15 अक्टूबर (एपी) यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोही चीनी कलपुर्जों की मदद से मध्यम दूरी की एक नयी उन्नत बैलिस्टिक मिसाइल प्रणाली विकसित करने का प्रयास कर रहे हैं।
युद्ध क्षेत्रों में हथियारों के इस्तेमाल पर नजर रखने वाले ब्रिटेन के संगठन ‘कॉन्फ्लिक्ट आर्मामेंट रिसर्च’ की एक नयी रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है।
यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के साथ जारी संघर्ष के दौरान ऐसी सेना के खिलाफ अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया है, जिसके बारे में माना जाता है कि वह अत्याधुनिक हथियारों से लैस है।
हूती विद्रोहियों द्वारा विकसित की जा रही यह हथियार प्रणाली उन्हें सऊदी अरब और इजराइल को अधिक सटीकता से निशाना बनाने में मदद कर सकती है। चीन का रुख करना हूती विद्रोहियों की बढ़ती आत्मनिर्भरता का भी संकेत माना जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, हूती विद्रोही चीनी आपूर्तिकर्ताओं से ऐसे प्रमुख कलपुर्जे हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं, जिनका इस्तेमाल ईरान की ‘खैबर शेकन’ मिसाइल की ही तरह की मिसाइल का निर्माण में किया जा सकता है। यह मिसाइल लगभग 2,000 किलोमीटर दूर तक लक्ष्य को भेद सकती है।
दुनिया भर के युद्ध क्षेत्रों में हथियारों की आपूर्ति या तस्करी पर शोध करने वाले संगठन ‘कॉन्फ्लिक्ट आर्मामेंट रिसर्च’ के वरिष्ठ विश्लेषक फैबियन हिंज ने कहा, ‘‘हथियार निर्माण को लेकर हूतियों की महत्वाकांक्षा पहले के अनुमानों से कहीं अधिक है।’’
हिंज ने कहा, ‘‘इस प्रकार के कलपुर्जे बेहद विशिष्ट हैं और इनके उत्पादन के लिए मिसाइल की बनावट से जुड़ी तकनीकी जानकारी की आवश्यकता होती है। ये ऐसी वस्तुएं नहीं हैं, जिनका इस्तेमाल नागरिक कार्यों में होता हो।’’
वाशिंगटन स्थित चीनी दूतावास ने इस संबंध में टिप्पणी के अनुरोध का कोई जवाब नहीं दिया।
चीन ईरान और सऊदी अरब, दोनों से बड़ी मात्रा में तेल खरीदता है। उसने इन संबंधों का लाभ उठाते हुए 2023 में दोनों देशों के बीच संबंध बहाल कराने में भूमिका निभाई थी।
एपी खारी शोभना
शोभना