रांची, 14 अक्टूबर (भाषा) बिहार पुलिस के एक उपनिरीक्षक ने बुधवार को आरोप लगाया कि यहां भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी) के छात्रावास के कमरे में उनके 19-वर्षीय बेटे की मौत 'निर्मम हत्या' थी। उन्होंने मामले की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) से कराने की मांग की।
बिहार के पूर्णिया जिले के रहने वाले उपनिरीक्षक का बेटा आदित्य कुमार 10 अक्टूबर की रात छात्रावास के कमरे में फंदे से लटका हुआ मिला था। संस्थान ने इसे आत्महत्या बताया है।
पटना में सीसी कैमरा कंट्रोल में तैनात उपनिरीक्षक विष्णुदेव कुमार ने गले पर फंदे का कोई निशान नहीं होने सहित कई विसंगतियों का हवाला देते हुए संस्थान के दावे को खारिज कर दिया।
मृतक के पिता ने दावा किया, ‘‘सात फुट ऊंचे कमरे में साढ़े तीन फुट ऊंची मेज थी और पंखा छत से एक फुट नीचे तक लटका हुआ था। साढ़े पांच फुट लंबा लड़का पंखे से कैसे लटक सकता है? जब भी कोई फंदे से लटका हुआ मिलता है, तो उसकी जीभ बाहर निकल आती है और आंखें बाहर की ओर उभर सकती हैं। मेरे बेटे की गर्दन पर फंदे का कोई निशान नहीं मिला।’’
उन्होंने कहा, ‘‘परिसर में कोई चिकित्सक उपलब्ध नहीं था। आदित्य के दोस्तों ने मुझे बताया कि अस्पताल ले जाए जाने के समय वह जीवित था। स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।’’
कुमार ने दावा किया कि 10 अक्टूबर को रात करीब 10 बजे उनकी अपने बेटे से फोन पर बात हुई थी और उन्हें ऐसा नहीं लगा कि वह किसी तनाव में था।
उन्होंने कहा, ‘‘यह निर्मम हत्या थी। मैंने कभी नहीं सोचा था कि दाखिले के दो महीने के भीतर ही अपने बेटे को खो दूंगा। मुझे न्याय चाहिए और मैं झारखंड सरकार से एक एसआईटी गठित करने का आग्रह करता हूं, ताकि निष्पक्ष जांच हो सके और सच्चाई सामने आ सके।’’
आदित्य आईआईआईटी रांची में कंप्यूटर साइंस का प्रथम वर्ष का छात्र था और उसने अगस्त में ही संस्थान में दाखिला लिया था।
कुमार ने यह भी आरोप लगाया, ‘‘मैंने लापरवाही बरतने को लेकर निदेशक सहित संस्थान के अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है, लेकिन थाना प्रभारी ने निदेशक का नाम हटाने को लेकर मुझ पर दबाव बनाया। हालांकि मैंने नाम नहीं हटाया।’’
खेलगांव थाना प्रभारी निर्भय कुमार ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि पुलिस ने घटना के प्रथम दृष्टया साक्ष्यों के आधार पर अप्राकृतिक मृत्यु का मामला दर्ज किया है।
आईआईआईटी रांची के निदेशक राजीव श्रीवास्तव को 30 दिनों की छुट्टी पर भेज दिया गया है।
भाषा प्रचेता सुरेश
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