नयी दिल्ली, 14 अक्टूबर (भाषा) केंद्रीय कानून मंत्रालय ने जिला और अधीनस्थ अदालतों में लंबित मुकदमों की बढ़ती संख्या से निपटने के लिए एक विशेष शोध आधारित पहल शुरू की है, जिसके तहत सर्वाधिक लंबित मामलों वाले 100 न्यायिक जिलों की पहचान की जाएगी।
मंत्रालय ने बुधवार को बताया कि भारत की अदालतों में 5.8 करोड़ से ज़्यादा मुकदमे लंबित हैं, जिनमें से अधिकतर मामले जिला और अधीनस्थ अदालतों में हैं। जिला अदालतों में लंबित कुल मामलों में से आधे से अधिक मामले उन 100 जिलों से हैं जिनकी पहचान ‘‘हॉटस्पॉट’’ (सर्वाधिक मुकदमे वाले) जिलों के तौर पर की गई है।
इस पहल के तहत, केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लंबित मुकदमों की संख्या घटाने की रणनीतियों पर चर्चा करने के लिए 16 राज्यों की 19 राष्ट्रीय विधि विश्वाद्यलयों के कुलपतियों के साथ एक वर्चुअल बैठक की अध्यक्षता की।
बैठक में कई उपायों पर चर्चा की गई, जिनमें निरर्थक हो चुके मुकदमों की पहचान करना, मामलों की प्रोफाइलिंग करना, विवाद सुलझाने के वैकल्पिक तरीकों को बढ़ावा देना, सुनवाई टालने की प्रक्रिया का प्रबंधन करना, सजा की अवधि घटाने के लिए अपना दोष स्वीकार करना और मध्यस्थता के मार्फत समझौते को प्रोत्साहित करना और त्वरित कार्यवाही के इस्तेमाल को बढ़ावा देना शामिल है।
राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों से कहा गया कि वे चुने हुए जिलों में लंबित मुकदमों का जमीनी स्तर पर आकलन करने के लिए अपनी मुफ़्त कानूनी सेवा क्लबों, शोधकर्ताओं और छात्रों का उपयोग करें।
भाषा सुभाष पवनेश
पवनेश