नयी दिल्ली, 14 अक्टूबर (भाषा) खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बुधवार को चांदी की रिफाइनरी और टकसालों के लिए प्रमाणन योजना शुरू की। इसका उद्देश्य देश में चांदी की सिल्लियों और सिक्कों की शुद्धता सुनिश्चित करना और उन पर हॉलमार्किंग को बढ़ावा देना है।
'विश्व मानक दिवस 2026' के अवसर पर यहां आयोजित एक कार्यक्रम में इस योजना की शुरुआत की गई।
एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने बीआईएस सिल्वर रिफाइनरी योजना के साथ उभरती प्रौद्योगिकियों और स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन से जुड़े नए भारतीय मानक भी पेश किए। इसके अलावा, टिकाऊ कृषि और विनिर्माण के लिए मानकीकरण का एक रोडमैप जारी किया गया।
बयान में कहा गया, “चांदी की रिफाइनरी और टकसालों के लिए बीआईएस प्रमाणन योजना से देशभर में चांदी की सिल्लियों और सिक्कों की शुद्धता सुनिश्चित करने तथा उन पर हॉलमार्क लगाने की व्यवस्थित व्यवस्था होगी। इससे चांदी की शुद्धता के लिए एक राष्ट्रीय ढांचा तैयार होगा, जो पहले से लागू स्वर्ण रिफाइनरी योजना पर आधारित है।”
उपभोक्ता मामलों के विभाग ने कहा कि राजपत्र अधिसूचना के बाद चांदी की 999.9, 999.5 और 999.0 शुद्धता वाली सिल्लियों और सिक्कों को मानक के दायरे में शामिल किया गया है। इन पर बीआईएस से लाइसेंस प्राप्त रिफाइनरी और टकसालें हॉलमार्क लगा सकेंगी।
इस योजना के तहत बीआईएस संबंधित रिफाइनरी और टकसालों की तकनीकी क्षमता, शोधन प्रक्रियाओं और जांच संबंधी सुविधाओं का आकलन करने के बाद उन्हें लाइसेंस देगा। लाइसेंस प्राप्त इकाइयां निर्धारित मानकों के अनुसार चांदी की सिल्लियों और सिक्कों पर आधिकारिक बीआईएस हॉलमार्क लगा सकेंगी।
भाषा योगेश प्रेम
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