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इलाहाबाद उच्च न्यायालय सांसद-विधायक से जुड़े आपराधिक मामलों को वाद सूची में नीचे रखने पर चिंता जताई

प्रयागराज, 14 अक्टूबर (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि सांसदों और विधायकों से जुड़े उच्च प्राथमिकता वाले आपराधिक मामलों को या तो गैर निर्दिष्ट अदालतों में सूचीबद्ध किया जा रहा है या फिर उन्हें वाद सूची में बहुत नीचे रखा जा रहा है जिससे असल में उनकी सुनवाई नहीं हो पा रही है।

न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ल की पीठ ने “सांसदों/विधायकों के लिए पुनर्निर्धारित अदालतें” विषय पर एक स्वतः संज्ञान जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश जारी किए।

पीठ ने आश्चर्य जताया कि कई जरूरी मामलों को या तो उन अदालतों में सूचीबद्ध किया जा रहा है जो उनके लिए तय नहीं थीं जिससे उन्हें “गलत तरीके से सूचीबद्ध किया गया” चिह्नित कर दिया जाता था, या फिर उन्हें वाद सूची में बहुत नीचे रखा गया जिससे भारी न्यायिक रोस्टर के कारण उनकी ठीक से सुनवाई नहीं हो सकी।

अदालत ने कहा कि किसी मामले को गैर निर्धारित अदालत में सूचीबद्ध करने से सुनवाई नहीं हो पाती, इसके अलावा वाद सूची में मामले को नीचे की ओर सूचीबद्ध करने से भी ऐसे मामलों की सुनवाई प्रभावी रूप से रुक जाती है।

अदालत ने कहा कि केवल सही तरीके से सूचीबद्ध होने पर ही सरकारी पक्ष मामले के जल्द निस्तारण के लिए प्रभावी ढंग से बात रख पाएगा।

अधीनस्थ अदालत में चल रहे मुकदमों की प्रशासनिक निगरानी को बेहतर बनाने के लिए उच्च न्यायालय ने सांसदों-विधायकों से जुड़े मामलों की निगरानी करने वाले पोर्टल में जरूरी सुधार करने के निर्देश दिए।

पीठ ने उच्चतम न्यायालय के समय सीमा से जुड़े निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए अलग अलग चरण में पैरामीटर बनाने, कलर-कोडेड ट्रैकिंग, सुनवाई करने वाले न्यायाधीशों को देरी का कारण बताने के लिए ड्रॉप-डाउन मेनू और समय समय पर होने वाली ऑडिट की रिपोर्ट जैसे कई उपायों पर जोर दिया।

उच्च न्यायालय में मौजूद अधीनस्थ अदालत के मूल रिकॉर्ड के संबंध में पीठ ने रजिस्ट्रार (जे) (आपराधिक) को तीन सप्ताह के भीतर एक संशोधित और विस्तृत चार्ट जमा करने का निर्देश दिया जिसमें हर लंबित मामले की सुनवाई के चऱण को स्पष्ट रूप से बताया गया हो।

इसके अलावा, अभियोजन अधिकारियों और न्यायिक अधिकारियों से निगरानी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सुझाव देने का अनुरोध किया गया। अदालत इस मामले में अगली सुनवाई छह नवंबर, 2026 को करेगी।

भाषा सं राजेंद्र सुरभि

सुरभि