नयी दिल्ली, 14 अक्टूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को धनशोधन मामले में ‘कॉनकास्ट स्टील एंड पावर लिमिटेड’ के मालिक और उद्योगपति संजय सुरेका को जमानत दे दी।
न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने कहा कि सुनवाई पूरी होने में काफी समय लगेगा, क्योंकि अधीनस्थ अदालत को हजारों पन्नों के दस्तावेज देखने होंगे और लगभग 98 गवाहों से पूछताछ करनी होगी।
पीठ ने कहा, “जब तक मुकदमा लंबित है, तब तक अपीलकर्ता को हिरासत की कठोरताओं के अधीन नहीं किया जाना चाहिए। इसलिए, अपीलकर्ता को जमानत पर रिहा किया जाना चाहिए, बशर्ते वह सुनवाई अदालत की संतुष्टि के अनुसार जमानत बॉण्ड भरें और अदालत द्वारा तय की गई अन्य शर्तों को मानें।”
न्यायालय ने सुरेका को निर्देश दिया कि वह अपना पासपोर्ट अधीनस्थ अदालत में जमा करें और सुनवाई के दौरान अदालत की पूर्व अनुमति के बिना देश छोड़कर न जाएं।
न्यायालय ने यह भी कहा कि जमानत पर रहने के दौरान सुरेका गवाहों को प्रभावित करने या सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश न करें।
उसने कहा कि जमानत की शर्तों का उल्लंघन होने पर, अधीनस्थ अदालत अपीलकर्ता की जमानत रद्द कर सकती है।
शिकायत के अनुसार, सुरेका ने भारी बैंक ऋण हासिल करने के लिए धोखाधड़ी से कंपनी का कारोबार बढ़ा-चढ़ा कर कर पेश किया और मुखौटा कंपनियों के जरिए रकम का हेर-फेर किया।
न्यायालय के आदेश के अनुसार, अपराध से जुड़ी कुल रकम 6,210.72 करोड़ रुपये है, जिसमें से अब तक केवल 777.10 करोड़ रुपये ही धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत जब्त किए गए हैं।
आरोप है कि सुरेका ने धनशोधन के लिए 62 मुखौटा कंपनियां बनाईं, 34 लोगों को छद्म रूप से निदेशक नियुक्त किया और अपने रिश्तेदारों द्वारा संचालित की जा रही 20 कंपनियों का इस्तेमाल किया।
उन्हें 18 दिसंबर, 2024 को प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया था।
भाषा प्रशांत अविनाश
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