लखनऊ, 14 अक्टूबर (भाषा) उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के 24 वर्षीय एक युवक ने गंभीर रूप से बीमार अपने पिता की जान बचाने के लिए चार महीने में करीब 20 किलोग्राम वजन घटाया और उन्हें अपने यकृत (लिवर) का एक हिस्सा दान किया।
चिकित्सकों के मुताबिक, यह यकृत प्रतिरोपण सफल रहा और मरीज को हाल ही में सर्जरी के करीब एक सप्ताह बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
विनीत सिंह (बदला हुआ नाम) दिल्ली की एक रियल एस्टेट कंपनी में काम करता था और उसके पिता अंकुश सिंह (बदला हुआ नाम) लिवर सिरोसिस की गंभीर अवस्था से पीड़ित थे और उन्हें यकृत प्रतिरोपण की सख्त जरूरत थी।
लखनऊ स्थित अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के चिकित्सकों ने बताया कि परिवार में विनीत ही जिगर दान करने के लिए संभावित रूप से उपयुक्त दाता था, लेकिन शुरुआती जांच में उसके जिगर में अत्यधिक चर्बी जमा होने का पता चला था।
चिकित्सकों के मुताबिक विनीत ‘फैटी लिवर’ की गंभीर स्थिति से ग्रस्त था और वसा का जमाव ग्रेड-3 से भी अधिक था और इसी वजह से वह तत्काल यकृत का एक हिस्सा दान करने के योग्य नहीं था।
विनीत ने बुधवार को यहां संवाददाताओं को बताया कि उसने अपनी सेहत सुधारने और चिकित्सकीय मानकों पर खरा उतरने के लिए नौकरी से छुट्टी ली और बांदा स्थित अपने घर पर रहकर चार महीने तक वजन घटाने पर काम किया।
उसने कहा, ‘‘मैंने वजन घटाने वाले इंजेक्शन या दवाओं का इस्तेमाल किए बिना करीब 20 किलोग्राम वजन कम किया। इसके बाद की जांच में मेरे यकृत की स्थिति में दान के लिए पर्याप्त सुधार पाया गया।''
अस्पताल में लिवर प्रतिरोपण विभाग के प्रमुख डॉक्टर अभिषेक यादव ने कहा कि विनीत का प्रयास सराहनीय है। उन्होंने बताया कि विनीत को अपने यकृत में वसा के अत्यधिक जमाव की पहले से जानकारी नहीं थी और यह बात तब सामने आई, जब वह अपने पिता को लिवर का हिस्सा दान करने के लिए मेडिकल जांच कराने पहुंचा।
डॉक्टर यादव ने बताया कि उन्होंने डॉक्टर उत्कर्ष श्रीवास्तव और अपनी टीम के साथ मिलकर यह जटिल ऑपरेशन किया और वजन घटाने की प्रक्रिया के दौरान लिवर में वसा की मात्रा में बदलाव का आकलन करने के लिए चार से पांच बार एमआरआई जांच की गई।
उन्होंने कहा कि चिकित्सकों ने शुरुआत में परिवार को अन्य संभावित दाताओं की तलाश करने की सलाह दी थी, लेकिन कोई दूसरा उपयुक्त दाता नहीं मिला, लिहाजा विनीत की सेहत में सुधार लाने के लिए चिकित्सकीय निगरानी में वजन घटाने की योजना अपनाई गई।
अस्पताल के अनुसार, प्रतिरोपण के बाद विनीत के पिता की हालत में भी सुधार हो रहा है।
चिकित्सकों ने बताया कि इस मामले में विनीत की ‘फैटी लिवर’ बीमारी का भी समय रहते पता चला। उन्होंने कहा कि शुरुआती अवस्था में इस बीमारी के स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते और कई लोगों को इसकी जानकारी नहीं होती।
चिकित्सकों ने बताया कि समय पर पहचान और उपचार न होने पर यह बीमारी लिवर में सूजन, फाइब्रोसिस (ऊतकों में कठोरता) और सिरोसिस जैसी गंभीर समस्याओं का रूप ले सकती है।
भाषा किशोर सलीम संतोष
संतोष