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‘‘कब्रिस्तान के लिए स्थानीय निकाय की जमीन पर दावा नहीं किया जा सकता”: इलाहाबाद उच्च न्यायालय

प्रयागराज, 14 अक्टूबर (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि धार्मिक आस्था के अनुसार अंतिम संस्कार करने के अधिकार सहित धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार, एक समुदाय को कब्रिस्तान बनाने के लिए स्थानीय निकाय की जमीन पर दावा करने का हकदार नहीं बनाता है।

न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की पीठ ने क्रिश्चियन कम्युनिटी वेलफेयर सोसाइटी द्वारा दायर रिट याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। सोसाइटी ने गाजियाबाद में एक ऊसर भूमि के एक टुकड़े को कब्रिस्तान में तब्दील करने के उसके अनुरोध को ठुकराए जाने को चुनौती दी थी।

अदालत ने सोमवार को अपने निर्णय में कहा, “ग्राम सभा या स्थानीय निकाय की जमीन को एक कब्रिस्तान में तब्दील करने के लिए एक कार्यकारी निर्णय आवश्यक है जिसमें विभिन्न कारकों और आकस्मिक स्थितियों पर विचार करना होता है।”

अदालत ने कहा, “किसी खास गैर सार्वजनिक उपयोग वाली भूमि को सार्वजनिक उपयोग वाली भूमि में बदलने की मांग करने का कोई ऐसा अधिकार किसी के पास नहीं है जिसे अदालत में लागू कराया जा सके।”

गाजियाबाद के मोदी नगर की क्रिश्चियन कम्युनिटी वेलफेयर सोसाइटी ने गाजियाबाद के जिला मजिस्ट्रेट के सात जनवरी, 2026 के आदेश पर सवाल खड़ा किया था जिसमें जिला मजिस्ट्रेट ने मोदी नगर तहसील के गांव विसोखर में स्थित 0.3420 हेक्टेयर भूमि की प्रकृति बदलकर उसे ईसाई कब्रिस्तान करने का प्रस्ताव ठुकरा दिया था।

अदालत ने कहा कि अगर वास्तव में जगह की कमी हो तो यह एक अलग बात होगी। ऐसे में अधिकारी उस इलाके में रहने वाले नागरिकों के व्यापक और विविध जनहित को ध्यान में रखते हुए इस तरह के अनुरोध पर विचार कर सकते हैं।

सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत पंजीकृत इस सोसाइटी ने अपने अध्यक्ष विनय कुमार पॉल के जरिए उच्च न्यायालय से संपर्क किया था। सोसाइटी ने दलील दी थी कि आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले ईसाई लोगों को अंतिम संस्कार करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि बेगमाबाद बुढ़ाना में ईसाई समुदाय के लिए मौजूद कब्रिस्तान में जगह कम पड़ रही है।

भाषा सं राजेंद्र सुरभि

सुरभि