नयी दिल्ली, 14 अक्टूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने टेट्रा पैक और पाउच जैसे आसानी से पहचान में नहीं आने वाले पैकेट में शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की अपील वाली याचिका पर बुधवार को केंद्र और राज्यों से चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति आर महादेवन और न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह की पीठ ने याचिकाकर्ता गैर-सरकारी संगठन ‘कम्युनिटी अगेंस्ट ड्रंकन ड्राइविंग’ को जवाब मिलने के बाद प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया। मामले में छह सप्ताह बाद विस्तृत सुनवाई होगी।
संगठन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विपिन नायर ने कहा कि 10 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में टेट्रा पैक में बेचे जा रहे पेय पदार्थों की पैकेजिंग पर भ्रामक तस्वीरें और ‘चिली मैंगो वोडका’ जैसे नाम लिखे होते हैं। उन्होंने कहा कि ये पैक फलों के रस जैसे दिखते हैं और इनमें शराब की मात्रा का उल्लेख छोटे अक्षरों में किया जाता है।
नायर ने कहा कि केंद्र और राज्यों ने याचिका पर अब तक जवाब दाखिल नहीं किया है।
याचिका में केंद्र को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए एक समान नीति बनाने तथा टेट्रा पैक और पाउच जैसी पैकेजिंग में शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। इसमें राज्यों के आबकारी कानूनों, नियमों और नीतियों में संशोधन कर बॉटलिंग की एक समान परिभाषा अपनाने की अपील भी की गई है।
याचिका के अनुसार, बोतल को कांच के कंटेनर या स्पष्ट रूप से अलग पहचान वाले अन्य पात्रों तक सीमित किया जाना चाहिए।
याचिका में कहा गया है कि ऐसी पैकेजिंग से शराब की खपत में काफी वृद्धि होने की आशंका है। इसमें पोर्टेबल प्लास्टिक बोतल, प्लास्टिक के पाउच और टेट्रा पैक में विशेष रूप से सस्ती शराब की बिक्री पर चिंता जताई गई है।
एक्शन अलायंस फॉर रिसाइक्लिंग बेवरेज कार्टन (एएआरसी) की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने संगठन को मामले में पक्षकार बनाने का अनुरोध किया।
उन्होंने दलील दी कि जनहित याचिका की आड़ में कागज आधारित कार्टन पैकेजिंग उद्योग को निशाना बनाया जा रहा है।
भाषा योगेश अजय
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