बीड, 14 अक्टूबर (भाषा) महाराष्ट्र के बीड जिले में डीजल के पैसे नहीं देने पर सरकारी एंबुलेंस से उतारे जाने बाद एक मजदूर को अपनी बेहोश 11-वर्षीय बेटी को कंधे पर उठाकर ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि पिछले महीने माजलगांव तहसील के दिंदरुड प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में हुई इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों में नाराजगी फैल गई, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने चिकित्सा अधिकारी डॉ. नीलेश धकने को पद से हटा दिया।
जिला स्वास्थ्य अधिकारी (डीएचओ) डॉ. उल्हास गांदल ने बुधवार को बताया कि डॉ. धकने को निलंबित करने समेत अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का प्रस्ताव स्वास्थ्य सेवा आयुक्त को भेज दिया गया है।
मिली जानकारी के अनुसार, 29 सितंबर को जिला परिषद स्कूल में पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाली छात्रा को गंभीर दौरा पड़ा, जिसके बाद वह बेहोश होकर गिर गई।
माजलगांव तहसील के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मधुकर घुबाडे ने बताया कि स्कूल के अधिकारियों ने बच्ची को तुरंत दिंदरुड प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां डॉ. धकने ने गंभीर हालत को देखते हुए उसे बेहतर इलाज के लिए किसी बड़े अस्पताल में ले जाने की सलाह दी।
उन्होंने परिवार के बयान का हवाला देते हुए कहा, “लेकिन जब बच्ची के पिता और परिवार के अन्य सदस्य एंबुलेंस में बैठे, तो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारियों ने कथित तौर पर उनसे ईंधन के पैसे मांगे।”
बच्ची के पिता मजदूरी करते हैं और पत्नी की मौत के बाद वह अपने चार बच्चों को पालने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
जांच की शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘उन्होंने पैसे नहीं होने की बात कहते हुए दया की गुहार लगाई। इसके बावजूद परिवार को एंबुलेंस से उतरने के लिए कह दिया गया।’’
भाषा जोहेब सुरेश
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