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फैसला करने वाले प्राधिकरण सीओसी की समाधान योजना में नहीं दे सकते दखलः एनसीएलएटी

नयी दिल्ली, 14 अक्टूबर (भाषा) राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने कहा है कि निर्णय करने वाले प्राधिकरण ऋणदाताओं की समिति (सीओसी) द्वारा स्वीकृत समाधान योजना पर अपीलीय अदालत की तरह विचार नहीं कर सकते हैं।

इसके साथ ही, एनसीएलएटी की दो-सदस्यीय पीठ ने कहा कि निर्णायक इकाई का अधिकार-क्षेत्र दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) में निर्धारित कानूनी प्रावधानों के अनुपालन की जांच तक सीमित है।

एनसीएलएटी ने मस्ताना फूड्स की समाधान योजनाओं को बरकरार रखते हुए एक असफल बोलीदाता और कंपनी के निलंबित निदेशकों की ओर से दायर पांच अपील खारिज कर दीं।

न्यायमूर्ति मोहम्मद फैज आलम खान और तकनीकी सदस्य नरेश सालेचा की पीठ ने कहा कि कर्जदाताओं की समिति के व्यावसायिक निर्णय में तब तक हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता, जब तक आईबीसी में निर्धारित आधार मौजूद न हों। कानून बनाने वालों ने जानबूझकर सीओसी के व्यावसायिक निर्णयों को न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर रखा है।

अपीलकर्ता अंबा ग्रेन्स प्राइवेट लिमिटेड और कंपनी के निलंबित निदेशकों अनिल खुराना तथा कृष्ण मोहन मेंदिरत्ता ने आरोप लगाया था कि ऑनलाइन बोली प्रक्रिया के बाद समाधान पेशेवर और सीओसी ने केवल सफल बोलीदाता को अपनी पेशकश बढ़ाने का अवसर दिया, जबकि अंबा की अधिक राशि वाली बोली पर विचार नहीं किया गया।

पीठ ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि सभी आवेदकों को 15 अप्रैल, 2025 से पहले बता दिया गया था कि उन्हें ऑनलाइन बोली में अपनी अंतिम पेशकश संशोधित समाधान योजनाओं में शामिल करनी होगी और बाद में किसी बदलाव की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसलिए अंबा की ओर से बाद में बढ़ी हुई राशि वाली योजना पेश करना बिना मांगी गई पेशकश थी।

ई-बोली के दौरान सफल बोलीदाता समूह ने 131.91 करोड़ रुपये की सबसे ऊंची बोली लगाई थी, जबकि अंबा की पेशकश 91.91 करोड़ रुपये थी।

एनसीएलएटी ने उच्चतम न्यायालय के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि असफल बोलीदाता मुकदमेबाजी के जरिये सीओसी के व्यावसायिक फैसलों को प्रक्रियागत खामी बताकर एक और अवसर हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं।

पीठ ने कहा कि उसे समाधान योजना को मंजूरी देने के राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के फैसले में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं मिला। इसके साथ ही उसने सभी पांच अपील खारिज कर दीं।

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय