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धन के लिए धर्म न छोड़ें संन्यासी, राष्ट्र की रक्षा के लिए संघर्ष को रहें तैयार : आदित्यनाथ

वाराणसी (उप्र), 14 अक्टूबर (भाषा) मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को कहा कि संन्यासी को धन के लिए धर्म का त्याग नहीं करना चाहिए और जरूरत पड़ने पर राष्ट्र तथा धर्म की रक्षा के लिए संघर्ष को तैयार रहना चाहिए।

आदित्यनाथ ने भारत सेवाश्रम संघ की काशी शाखा के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए कहा, ''संन्यासी के जीवन का ध्येय होना चाहिए.. धन के लिए धर्म नहीं त्यागूंगा। छिड़ गया युद्ध तो बम-गोले दागूंगा।''

उन्होंने कहा कि देश और धर्म के लिए किया गया हर बलिदान महान है और शांति के लिए संयम, सद्भाव तथा लोककल्याण जरूरी हैं, लेकिन राष्ट्र और धर्म की रक्षा के लिए संघर्ष से पीछे नहीं हटना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत सेवाश्रम संघ ने प्रतिकूल परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों को बनाए रखते हुए आध्यात्मिक साधना को राष्ट्रीय जागरण और जनकल्याण से जोड़ा है और वर्ष 1926 में स्थापित इसकी काशी शाखा ने सेवा और राष्ट्रीय जागरण के 100 वर्ष पूरे कर लिए हैं।

उन्होंने इस अवसर पर संगठन के संस्थापक स्वामी प्रणवानंद महाराज को पुष्पांजलि अर्पित की और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया।

आदित्यनाथ ने कहा कि संकट के समय राष्ट्र की आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत पर खतरा पैदा होता है।

मुख्यमंत्री ने काशी विश्वनाथ मंदिर का जिक्र करते हुए दावा किया कि विदेशी आक्रांताओं के हमलों ने देश की सांस्कृतिक विरासत को नुकसान पहुंचाया।

उन्होंने अयोध्या की राम जन्मभूमि और मथुरा की कृष्ण जन्मभूमि का जिक्र करते हुए कहा कि देश को आंतरिक विभाजन की कीमत चुकानी पड़ी।

आदित्यनाथ ने कहा कि संतों ने आध्यात्मिक साधना के जरिए राष्ट्रीय चेतना जगाने का प्रयास किया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में काशी विश्वनाथ धाम और अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण इसी राष्ट्रीय चेतना और संकल्प का प्रतीक है।

गोरक्षपीठ और स्वामी प्रणवानंद के संबंधों पर रोशनी डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी प्रणवानंद ने 1912-13 में गोरखपुर का दौरा किया था और सिद्ध योगी बाबा गंभीरनाथ के सान्निध्य में ध्यान-साधना की थी, जहां मिली आध्यात्मिक प्रेरणा ने उन्हें राष्ट्रीय जागरण के कार्यों के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने कहा कि भारत सेवाश्रम संघ जरूरतमंदों को राहत, तीर्थयात्रियों की सहायता, स्वास्थ्य, शिक्षा, जनजातीय कल्याण और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के क्षेत्र में काम कर रहा है।

भाषा सलीम संतोष

संतोष