नयी दिल्ली, 14 अक्टूबर (भाषा) जनसांख्यिकीय बदलावों पर गठित उच्चस्तरीय समिति ने बुधवार को एक पोर्टल शुरू किया, जिसके माध्यम से लोगों और केंद्र तथा राज्य सरकारों के विभागों से ‘अस्वाभाविक जनसांख्यिकीय बदलाव’ के बारे में जानकारी मांगी गई है।
सरकार के एक बयान के मुताबिक, इस जानकारी का इस्तेमाल देश में रह रहे अवैध प्रवासियों की पहचान करने, उन्हें हिरासत में लेने और निर्वासित करने के लिए एक व्यवस्था विकसित करने में किया जाएगा।
समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) प्रकाश प्रभाकर नाओलेकर ने संबंधित पक्षों से सुझाव प्राप्त करने और आंकड़ों के आदान-प्रदान के लिए समर्पित डिजिटल वेब पोर्टल की शुरुआत की।
बयान में कहा गया, ‘‘यह पोर्टल केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों, राज्य एवं केंद्र-शासित प्रदेशों की सरकारों, गैर-सरकारी संगठनों और संस्थानों तथा व्यक्तियों को अस्वाभाविक जनसांख्यिकीय बदलावों, उनके कारणों और इनके पीछे मौजूद कारकों, असामान्य बसावट के तौर-तरीकों आदि के बारे में सुझाव, आंकड़े और जानकारी देने की सुविधा प्रदान करता है।’’
बयान में कहा गया कि प्राप्त जानकारी से समिति को जनसांख्यिकीय बदलावों के कारणों का विश्लेषण करने और उनकी पहचान करने में मदद मिलेगी।
समिति ने आठ बिंदुओं वाली एक प्रश्नावली भी पोर्टल पर उपलब्ध कराई है, जिसके माध्यम से अस्वाभाविक जनसांख्यिकीय बदलाव से संबंधित जानकारी और दस्तावेज उपलब्ध कराए जा सकते हैं।
भाषा शफीक पारुल
पारुल