मुंबई, 14 अक्टूबर (भाषा) रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल और दूरसंचार इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड ने अपने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के लिए 1,065 से 1,119 रुपये प्रति शेयर का मूल्य दायरा तय किया है। इससे ऊपरी मूल्य स्तर पर कंपनी करीब 30,213 करोड़ रुपये जुटा सकती है। इससे यह देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ हो जाएगा।
जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर को बंद होगा।
रिलायंस की तरफ से बुधवार को दी गई नियामकीय सूचना के मुताबिक, निर्गम में 10 रुपये अंकित मूल्य वाले अधिकतम 27 करोड़ इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे। वहीं, बड़े संस्थागत यानी एंकर निवेशकों के लिए बोली प्रक्रिया 19 अक्टूबर को होगी।
जियो प्लेटफॉर्म्स के निदेशक मंडल की आईपीओ समिति ने बुधवार को हुई बैठक में शेयरों का मूल्य दायरा मंजूर किया। पात्र कर्मचारी आरक्षित हिस्से में बोली लगाने पर प्रति शेयर 54 रुपये की छूट पाएंगे।
निवेशकों को कम-से-कम 12 शेयरों के लिए बोली लगानी होगी। इसके बाद 12 शेयरों के गुणक में बोली लगाई जा सकेगी। इस तरह, ऊपरी मूल्य स्तर पर एक लॉट की कीमत 13,428 रुपये होगी।
आईपीओ को लेकर जून में दाखिल मसौदा दस्तावेज के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में जियो प्लेटफॉर्म्स का परिचालन राजस्व 14.6 प्रतिशत बढ़कर 1,46,885 करोड़ रुपये रहा, जो एक साल पहले 1,28,218 करोड़ रुपये था। इस दौरान कंपनी का शुद्ध लाभ भी 15.1 प्रतिशत बढ़कर 30,049 करोड़ रुपये रहा, जो एक साल पहले 26,109 करोड़ रुपये था।
जियो प्लेटफॉर्म्स का प्रस्तावित आईपीओ भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के 20,557.23 करोड़ रुपये के आईपीओ से करीब 47 प्रतिशत बड़ा होगा।
जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ पूरी तरह नए शेयर जारी करने पर आधारित होगा। इसमें मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी बेचने का कोई प्रस्ताव नहीं है। इसलिए इससे जुटाई गई राशि कंपनी को मिलेगी, मौजूदा शेयरधारकों को नहीं।
कंपनी के शेयर के 28 अक्टूबर को शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की उम्मीद है।
जियो प्लेटफॉर्म्स ने पात्र कर्मचारियों के लिए 500 करोड़ रुपये तक और रिलायंस इंडस्ट्रीज के पात्र शेयरधारकों के लिए 2,500 करोड़ रुपये तक के शेयर आरक्षित रखे हैं। 14 अक्टूबर तक रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर रखने वाले व्यक्ति और हिंदू अविभाजित परिवार इस श्रेणी में आवेदन कर सकते हैं।
आईपीओ से पहले जियो प्लेटफॉर्म्स में रिलायंस इंडस्ट्रीज की 66.43 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। मेटा और गूगल की संयुक्त हिस्सेदारी करीब 17.7 प्रतिशत है।
भाषा योगेश प्रेम
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