नयी दिल्ली, 14 अक्टूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को केंद्र सरकार से कहा कि वह मानव और हाथी के बीच संघर्ष के कारण फसल को हुए नुकसान के लिए मुआवजे के मुद्दे पर विचार करे।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ विभिन्न राज्यों से गुजरने वाले हाथी गलियारों (एलिफेंट कॉरिडोर) से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने न्यायालय के 17 अगस्त के उस आदेश का जिक्र किया, जिसमें पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को एक नया सर्वे करने और एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया था।
रिपोर्ट में हाथी गलियारों में इस वन्य जीव की मुक्त आवाजाही में व्यवधान पैदा करने वाले कारकों की रोकथाम करने लिए मंत्रालय द्वारा उठाए गए आवश्यक कदमों की जानकारी भी देने को कहा गया था।
भाटी ने पीठ को बताया कि उन्हें कुछ राज्यों से जानकारी मिली है, और रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कुछ समय मांगा।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वकील ने मुआवजे के मुद्दे का ज़िक्र किया।
वकील ने कहा, ‘‘यह मामला मानव और हाथी के बीच संघर्ष से जुड़ा है और मुख्य मुद्दों में फसल के नुकसान आदि के लिए मुआवजा है।’’
पीठ ने भाटी से कहा, ‘‘आप इस पहलू की जांच करें।’’
न्यायालय ने 17 अगस्त को मंत्रालय को यह पता लगाने के लिए सर्वे करने का निर्देश दिया था कि क्या किसी राज्य ने हाथी गलियारे में कोई बाधा खड़ी की है।
भाषा सुभाष रंजन
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