नयी दिल्ली, 14 अक्टूबर (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय ने बुधवार को आरोप लगाया कि ‘लड्डू प्रसादम’ बनाने के लिए आंध्र प्रदेश स्थित तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) को 234.5 करोड़ रुपये के मिलावटी घी की आपूर्ति करने वाली कंपनियों ने हवाला के जरिये लेन-देन किए थे।
केंद्रीय एजेंसी ने एक बयान में कहा कि उसने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत आरोपी कंपनियों और उनके प्रवर्तकों की 129.85 करोड़ रुपये की संपत्ति को अस्थायी रूप से जब्त किया है।
ईडी ने जिन संस्थाओं के नाम लिए हैं, उनमें ‘भोले बाबा ऑर्गेनिक डेरीमिल्क’ और ‘श्री वैष्णवी डेरी स्पेशलिटीज’, उनके प्रवर्तक विपिन जैन और पोमिल जैन तथा उनके परिवार के सदस्य भी शामिल हैं। इसके अलावा ‘सुकृति फूड्स’, इसके प्रवर्तक कैलाश चंद मंगला और उनके परिवार के सदस्यों के नाम भी लिए गए हैं।
एजेंसी ने आरोप लगाया कि ‘भोले बाबा’ ने टीटीडी को सीधे और उन ‘मुखौटा डेरियों’ के जरिए मिलावटी घी की आपूर्ति की, जिन्होंने कमीशन के बदले अपने नाम से टीटीडी की निविदा के लिए बोली लगाई थी।
ईडी का दावा है कि भोले बाबा और सुकृति फूड्स के कारखानों में ‘‘रिफाइंड पाम ऑयल, पाम कर्नल ऑयल और पामोलिन’’ को विभिन्न रसायनों के साथ मिलाकर कथित तौर पर घी बनाया गया और फिर उसे खाने वाले तेल के तौर पर बिल बनाया गया।
एजेंसी ने कहा, “खातों में हेराफेरी करने के लिए, खपत किए गए पाम ऑयल को फर्जी खरीदारों को बेचा हुआ दिखाया गया, जबकि दूध और घी की काल्पनिक खरीद तथा स्किम्ड मिल्क जैसे उत्पादों की काल्पनिक बिक्री दर्ज की गई, ताकि डेरी का वास्तविक कारोबार होने का आभास दिया जा सके।”
ईडी के अनुसार, कथित तौर पर फर्जी खरीद के लिए बैंकिंग चैनलों के जरिए किए गए भुगतान हवाला माध्यमों के जरिए नकदी में वापस कर दिए गए।
एजेंसी ने कहा कि इस नकदी का इस्तेमाल कथित तौर पर नकली पाम-ऑयल खरीदारों को रकम देने, मुखौटा कंपनियों का कमीशन चुकाने और धोखाधड़ी से जुड़े अन्य लोगों को भुगतान करने के लिए किया गया।
भाषा प्रशांत अविनाश
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