नयी दिल्ली, 14 अक्टूबर (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव एम. ए. बेबी ने बुधवार को पार्टी के दिग्गज नेता रहे हरकिशन सिंह सुरजीत द्वारा किशोरावस्था में अंग्रेजी हुकूमत की अवज्ञा किए जाने की घटना का जिक्र करते हुए इसकी तुलना प्रदर्शन के अधिकार की रक्षा के लिए दिल्ली के जंतर-मंतर पर एकत्र हुए प्रदर्शनकारियों को जेल भेजे जाने से की।
बेबी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को आगाह करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों का उत्पीड़न अंग्रेजों के लिए अच्छा साबित नहीं हुआ था और मौजूदा सत्ताधारियों के लिए भी इसका नतीजा अलग नहीं होगा।
उन्होंने कहा, ‘‘वर्ष 1932 में भगत सिंह की शहादत की पहली बरसी पर 16 साल के एक लड़के ने पंजाब के होशियारपुर जिला न्यायालय में तिरंगा फहराया था। इस ‘अपराध’ के लिए अंग्रेजों ने उस पर गोली चलाई और उसे जेल में डाल दिया। वह लड़का आगे चलकर माकपा का महासचिव बना। उसका नाम हरकिशन सिंह सुरजीत था।’’
बेबी ने जिस घटना का जिक्र किया, वह भगत सिंह की शहादत की पहली बरसी पर 23 मार्च 1932 को हुई थी। उस समय 16 वर्षीय सुरजीत ने होशियारपुर जिला न्यायालय में तिरंगा फहराया था। ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा गोली चलाने की धमकी दिए जाने के बाद स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने झंडा फहराने का अपना प्रस्तावित कार्यक्रम रद्द कर दिया था।
ऐतिहासिक विवरण के अनुसार, सुरजीत को गिरफ्तार कर लिया गया और किशोर सुधार गृह में एक साल की सजा सुनाई गई। मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए जाने पर उन्होंने कथित तौर पर अपना नाम ‘लंदन तोड़ सिंह’ बताया था।
बेबी ने कहा कि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के सदस्य सौरव दास और आशुतोष रांका जंतर-मंतर पर शांतिपूर्वक एकत्र होने और राष्ट्रीय ध्वज लहराने के कारण जेल में हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि माकपा के राज्यसभा सदस्य ए. ए. रहीम और वी. शिवदासन के साथ ही छात्र एवं युवा प्रदर्शनकारियों के साथ भी दिल्ली पुलिस ने उस समय कथित तौर पर धक्का-मुक्की की और उन्हें हिरासत में लिया, जब वे शांतिपूर्वक जंतर-मंतर की ओर मार्च कर रहे थे।
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