लखनऊ, 14 अक्टूबर (भाषा) एफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर को लखनऊ मेट्रो के पूर्व-पश्चिम गलियारे में चारबाग से चौक मेट्रो स्टेशन के बीच करीब 6.52 किलोमीटर के हिस्से के निर्माण एवं डिजाइन के कार्य के लिये चयनित किया गया है।
उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (यूपीएमआरसी) द्वारा जारी एक बयान के मुताबिक लखनऊ मेट्रो के पूर्व-पश्चिम गलियारे (ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर) (फेज-1बी) के तहत चारबाग से चौक तक लगभग 6.52 किलोमीटर लंबे भूमिगत हिस्से के निर्माण के लिए एफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर को सबसे कम लागत की बोली लगाने वाली फर्म घोषित किया गया है।
बयान के मुताबिक कंपनी ने इस परियोजना के लिए जीएसटी सहित 1,632 करोड़ रुपये की बोली लगाई है।
बयान के अनुसार इस परियोजना के तहत सात भूमिगत मेट्रो स्टेशनों का निर्माण और उनसे संबंधित अन्य कार्य शामिल हैं। मेट्रो मार्ग का यह हिस्सा पुराने लखनऊ के घनी आबादी वाले इलाकों से होकर गुजरेगा।
अधिकारियों ने बताया कि इस निविदा प्रक्रिया में कुल पांच कंपनियों एफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर के अलावा सैम इंडिया प्रोजेक्ट्स, लार्सन एंड टुब्रो, हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी और टाटा प्रोजेक्ट्स ने हिस्सा लिया था और परियोजना की वित्तीय निविदा पांच अक्टूबर 2026 को खोली गई थी।
उन्होंने बताया कि स्वीकृति पत्र जारी होने के बाद निर्माण कार्य पूरा करने के लिए तीन साल की समय-सीमा निर्धारित की गई है।
अधिकारियों ने बताया कि पूर्व-पश्चिम गलियारे के तहत पांच उपरिगामी मेट्रो स्टेशनों के वायाडक्ट और वसंत कुंज मेट्रो डिपो के निर्माण के लिए निविदाएं पहले ही आवंटित की जा चुकी हैं।
बयान के अनुसार यूपीएमआरसी लगभग 5,801 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से लखनऊ मेट्रो के फेज-1बी का निर्माण कर रहा है और इस कॉरिडोर में कुल 12 स्टेशन होंगे, जिनमें पांच उपरिगामी और सात भूमिगत स्टेशन शामिल हैं।
अधिकारियों ने बताया कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर मेट्रो सेवाएं शुरू करने के उद्देश्य से दोनों सेक्शनों का निर्माण एक साथ आगे बढ़ाया जाएगा।
यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक सुशील कुमार ने कहा कि ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर पुराने और नए लखनऊ के बीच संपर्क बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने कहा कि चारबाग से वसंत कुंज तक मेट्रो का विस्तार पुराने लखनऊ के घनी आबादी वाले और ऐतिहासिक क्षेत्रों के आसपास तेज, सुरक्षित तथा पर्यावरण के अनुकूल सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराने में मदद करेगा।
कुमार के मुताबिक, इस परियोजना से आवागमन सुगम होने के साथ पुराने लखनऊ में बुनियादी ढांचे के विकास को भी गति मिलेगी। उन्होंने बताया कि इसके अलावा, यह गलियारा सड़क यातायात का दबाव कम करने और शहर में सतत एवं एकीकृत शहरी विकास को बढ़ावा देने में सहायक होगा।
भाषा सलीम संतोष
संतोष