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नए उत्सर्जन मानक बीएस-7 को अप्रैल, 2029 से लागू करने का प्रस्ताव, ब्रेक-टायर के भी कड़े प्रावधान

नयी दिल्ली, 14 अक्टूबर (भाषा) सरकार ने यात्री वाहनों के लिए एक अप्रैल, 2029 से नए उत्सर्जन मानक 'बीएस-7' लागू करने का प्रस्ताव रखा है। इसमें वाहनों से निकलने वाले प्रदूषकों की सीमा सख्त की जाएगी और वास्तविक परिस्थितियों में उत्सर्जन की जांच के साथ बैटरी की टिकाऊ क्षमता से जुड़े मानक भी लागू होंगे।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन की मसौदा अधिसूचना जारी कर 30 दिन में सुझाव मांगे हैं। यह प्रस्ताव मुख्य रूप से यात्री कारों सहित एम1 श्रेणी के वाहनों पर लागू होगा।

नए उत्सर्जन मानक 'भारत स्टेज-7' (बीएस-7) तीन चरणों में लागू किए जाएंगे। मसौदे में नए मानकों को अप्रैल 2029, अप्रैल 2031 और अप्रैल 2035 से तीन चरणों में लागू करने का प्रस्ताव है। इस तरह, पहले चरण के मानक लागू होने से पहले वाहन निर्माताओं को करीब ढाई साल का समय मिलेगा।

नए मानक के पहले चरण में निकास उत्सर्जन के साथ ईंधन खपत, बिजली की खपत और बैटरी की टिकाऊ क्षमता से जुड़े प्रावधान होंगे। वहीं, अप्रैल 2031 से ब्रेक से निकलने वाले कणों और टायरों के घिसने से होने वाले प्रदूषण पर भी सीमाएं लागू की जाएंगी। तीसरे चरण से अलग-अलग तरह के वाहनों के लिए ब्रेक कण उत्सर्जन की एकसमान सीमा लागू करने की योजना है।

मसौदे में इलेक्ट्रिक और प्लग-इन हाइब्रिड वाहनों की बैटरी के लिए भी टिकाऊ क्षमता के मानक तय किए गए हैं। बैटरी को पांच साल या एक लाख किलोमीटर तक कम-से-कम 75 प्रतिशत क्षमता और आठ साल या 1.6 लाख किलोमीटर तक कम-से-कम 67 प्रतिशत क्षमता बनाए रखनी होगी।

प्रस्ताव में सड़क परिवहन की वास्तविक परिस्थितियों में उत्सर्जन जांच, वाहनों में उत्सर्जन की निगरानी करने वाली प्रणालियों और ईंधन एवं बिजली की खपत पर नजर रखने की व्यवस्था भी की गई है। खरीदारों को वाहन के उत्सर्जन, ईंधन खपत और बैटरी की स्थिति की जानकारी देने वाला ‘पर्यावरण वाहन पासपोर्ट’ उपलब्ध कराने का भी प्रस्ताव है।

मसौदे में पेट्रोल और डीजल वाहनों के लिए भू-सीमा आधारित जियोफेंसिंग प्रौद्योगिकी के साथ बीएस-7-जी श्रेणी में मंजूरी का प्रावधान भी है। वाहन विनिर्माताओं को ई20 से अधिक एथनॉल मिश्रण वाले ईंधन के अनुकूल वाहनों पर इसका स्पष्ट उल्लेख करना होगा।

भारत में अप्रैल, 2020 से बीएस-6 मानक लागू हैं। प्रदूषण नियंत्रण में तेजी लाने के लिए भारत ने बीएस-4 के बाद सीधे बीएस-6 मानक अपनाए थे। बीएस-6 वाहन के लिए कम सल्फर वाले ईंधन का इस्तेमाल जरूरी है।

भाषा प्रेम प्रेम योगेश

योगेश