नयी दिल्ली, 14 अक्टूबर (भाषा) केंद्र सरकार ने बहुराज्यीय सहकारी समितियों के क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने, पेशेवर प्रबंधन सुनिश्चित करने और जवाबदेही मजबूत करने के साथ सदस्यों के हितों की रक्षा के लिए बुधवार को एक नया लेखा परीक्षा (ऑडिट) रिपोर्टिंग ढांचा घोषित किया।
सहकारिता मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि बहुराज्यीय सहकारी समितियां (ऑडिटर रिपोर्ट) आदेश, 2026 (एमएससीएआरओ 2026) को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, ताकि सहकारी समितियों को अपनी प्रणालियों और प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने के लिए समय मिल सके।
पहले चरण में 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की सीमा वाली समितियों को शामिल किया जाएगा।
मंत्रालय ने कहा कि दीर्घकालिक उद्देश्य इस ढांचे को उन बहुराज्यीय सहकारी समितियों तक विस्तारित करना है, जो संबंधित वित्तीय मानकों में 50 करोड़ रुपये की सीमा पार करती हैं।
बहुराज्यीय सहकारी समितियां (संशोधन) अधिनियम, 2023 के तहत केंद्र सरकार को धारा 73(6) के माध्यम से इन समितियों के लिए लेखा परीक्षा और लेखांकन मानक निर्धारित करने का अधिकार दिया गया था।
मंत्रालय ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान (आईसीएआई), भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) और संबंधित सहकारी समितियों से मिले सुझावों के आधार पर यह आदेश तैयार किया है।
कंपनी क्षेत्र में लागू कंपनी (लेखा परीक्षक की रिपोर्ट) आदेश (सीएआरओ) की तर्ज पर तैयार एमएससीएआरओ में वैधानिक लेखा परीक्षा रिपोर्टिंग के लिए एक समान और जोखिम-आधारित प्रारूप निर्धारित किया गया है। इसके तहत लेखा परीक्षकों को वित्तीय, प्रशासनिक, शासन और अनुपालन संबंधी मानकों पर टिप्पणियों के साथ मानकीकृत ‘हां’ या ‘नहीं’ के रूप में जवाब देना होगा।
मंत्रालय ने कहा कि इससे लेखा परीक्षा रिपोर्टिंग में एकरूपता आएगी, अनियमितताओं का पता लगाने में मदद मिलेगी और नियामकीय निगरानी मजबूत होगी।
केंद्रीय सहकारी समितियों के पंजीयक (सीआरसीएस) कार्यालय को लेखा परीक्षा संबंधी टिप्पणियों के आधार पर वित्तीय या प्रशासनिक जोखिम वाली समितियों की पहचान करने में मदद मिलेगी। इससे अधिक जोखिम वाली समितियों पर केंद्रित निरीक्षण, जांच और अन्य नियामकीय कार्रवाई की जा सकेगी।
बयान के अनुसार, गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए), बकाया ऋणों, नकदी की उपलब्धता, जमा, अग्रिम, ऋण चुकाने में चूक और उधारी की व्यवस्थित रिपोर्टिंग से संभावित जोखिमों को गंभीर समस्या बनने से पहले पहचानने में मदद मिलेगी।
मंत्रालय ने कहा कि लेखा परीक्षा संबंधी आवश्यकताओं के तहत निवेश, धन के उपयोग, शेयर पूंजी, सदस्यता रिकॉर्ड और वैधानिक मंजूरियों का स्वतंत्र सत्यापन किया जा सकेगा। इससे वित्तीय विश्वसनीयता और सदस्यों का भरोसा मजबूत होगा।
भाषा राजेश राजेश अजय
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