वायनाड, 14 अक्टूबर (भाषा) केरलम में पारंपरिक धान की किस्मों को बचाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर देने वाले एवं पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित आदिवासी किसान चेरुवयाल रमन का बुधवार को कोझिकोड मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। वह 74 वर्ष के थे।
मनानथावडी स्थित कम्मनम के रहने वाले रमन, धान की ऐसी 45 से अधिक देसी किस्मों को बचाने के लिए जाने जाते हैं, जिनके विलुप्त होने का खतरा था।
उन्होंने दशकों तक पारंपरिक जैविक खेती के तरीकों को अपनाया और इलाके की खेती-बाड़ी से जुड़ी पंरपरा को अगली पीढ़ियों तक पहुंचाने का काम किया।
रमन कम्मनम नवोदय लोअर प्राइमरी स्कूल से अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद, 10 साल की उम्र से खेती-बाड़ी में अपने परिवार का हाथ बंटाने लगे थे।
खेती के प्रति उनका जुनून इतना ज़्यादा था कि उन्होंने 1969 में कन्नूर डीएमओ कार्यालय में सरकारी नौकरी ठुकरा दी।
कुरिचिया आदिवासी समुदाय से ताल्लुक रखने वाले रमन ने अपने खेत में पारंपरिक सब्जियों, औषधीय पौधों और पेड़ों की विभिन्न किस्मों को भी संरक्षित किया।
देशज पौधों की किस्मों के संरक्षण और पर्यावरण-अनुकूल खेती को बढ़ावा देने में उनके योगदान के लिए उन्हें 2023 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था।
इससे पहले, उन्हें कई सम्मान मिल चुके थे, जिनमें 2016 का राष्ट्रीय पौधा जीनोम रक्षक पुरस्कार भी शामिल है।
मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने रमन के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें वायनाड की कृषि विरासत का संरक्षक बताया, जिन्होंने आने वाली पीढ़ियों के लिए धान की पारंपरिक किस्मों को संजोकर रखा।
भाषा सुभाष रंजन
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