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कम बारिश से इंदौर में जल संकट की आहट, 50 करोड़ रुपये के राहत पैकेज की मांग

इंदौर, 14 अक्टूबर (भाषा) मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले इंदौर में इस बार सामान्य से करीब 27 प्रतिशत कम मॉनसूनी बारिश के कारण आने वाले दिनों में जल संकट गहराने की आशंका है। इससे निपटने के लिए नगर निगम ने राज्य सरकार से 50 करोड़ रुपये के राहत पैकेज की मांग की है।

महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बुधवार को 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि पिछली गर्मियों में शहर के करीब 6,000 नलकूप सूख गए थे और इस बार कम बारिश के कारण इनकी संख्या बढ़ सकती है।

उन्होंने कहा कि करीब 35 लाख की आबादी वाले शहर में आसन्न जल संकट से निपटने के लिए राज्य सरकार से 50 करोड़ रुपये की राहत राशि मांगी गई है।

अधिकारियों ने बताया कि इंदौर जिले में एक जून से 30 सितंबर तक मॉनसून अवधि में 633.1 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई जो 868.1 मिलीमीटर की सामान्य वर्षा की तुलना में 27 प्रतिशत कम है।

इंदौर शहर अपनी पेयजल जरूरतों के लिए मुख्य रूप से नर्मदा नदी पर निर्भर है। नगर निगम की पाइपलाइन के जरिये पड़ोसी खरगोन जिले के जलूद से लगभग 80 किलोमीटर दूर इंदौर तक नर्मदा का पानी लाया जाता है और फिर इसे शहर भर में वितरित किया जाता है।

महापौर भार्गव ने बताया कि शहर को नर्मदा नदी से करीब 450 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) पानी मिलता है, जबकि नर्मदा की पाइपलाइन से वंचित इलाकों की जरूरत करीब 200 एमएलडी है। इस तरह, शहर की कुल दैनिक जल जरूरत करीब 650 से 700 एमएलडी तक पहुंचती है।

उन्होंने बताया कि नगर निगम उन इलाकों के लिए विशेष योजना तैयार कर रहा है, जहां नर्मदा की पाइपलाइन नहीं है और लोगों को पानी के लिए नलकूपों या टैंकर पर निर्भर रहना पड़ता है।

महापौर ने कहा कि नर्मदा-गंभीर लिंक परियोजना और नर्मदा-क्षिप्रा लिंक परियोजना के पानी से दिसंबर में यशवंत सागर और बिलावली तालाबों को भरने की योजना है।

उन्होंने बताया,‘‘शहर की नर्मदा पाइपलाइन से थोक जल कनेक्शन देने पर रोक लगाई गई है। हमने जिला प्रशासन से लोगों के निजी स्तर पर नये नलकूपों की खुदाई पर जल्द प्रतिबंध लगाने का अनुरोध भी किया है।’’

अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल शहर के करीब 30 प्रतिशत हिस्से में नर्मदा की पाइपलाइन नहीं है और आने वाले दिनों में इन इलाकों में जल संकट अधिक गहराने की आशंका है।

भूजल वैज्ञानिक सुधीन्द्र मोहन शर्मा ने कहा कि कम बारिश से शहर में भूजल का पुनर्भरण घटा है और दोहन में इजाफे से भूजल पर लगातार दबाव बढ़ेगा।

उन्होंने कहा,‘‘कम बारिश और जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाले दिनों में तापमान में वृद्धि के कारण वाष्पीकरण बढ़ेगा और मिट्टी में नमी घटेगी। इससे पेड़-पौधों और फसलों के लिए भी पानी की जरूरत बढ़ेगी।’’

शर्मा ने कहा कि इन हालात में प्रशासन और नागरिकों को मिलकर शहर का 'जल बजट' तैयार करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि शहर में जल की मांग और पूर्ति का आकलन करके तय किया जाना चाहिए कि अगली मॉनसूनी बारिश तक प्रतिदिन कितना पानी खर्च किया जा सकता है।

भाषा हर्ष संतोष

संतोष