(फाइल फोटो के साथ)
कोलकाता, 14 अक्टूबर (भाषा) कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि विपक्ष की आवाज को दबाया नहीं जाना चाहिए, क्योंकि यह लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है।
उच्च न्यायालय ने यह टिप्पणी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की उस याचिका पर सुनवाई के दौरान की जिसमें पार्टी ने दुर्गा पूजा के दौरान बोंगांव के जेसोर रोड पर एक बुकस्टॉल लगाने की इजाज़त मांगी थी।
याचिकाकर्ता के वकील ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल के उत्तरी 24 परगना जिले के बोंगांव में दुर्गा पूजा पंडाल के पास अब हिंदू जागरण मंच का स्टॉल लग गया है जबकि वहां माकपा पिछले 50 साल से अपना अस्थायी बुकस्टॉल लगाती आ रही है।
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘अन्य पार्टियों की आवाज न दबाएं, यह लोकतंत्र की भावना नहीं है।’’
जब महाधिवक्ता सुरोजित नाथ मित्रा ने कहा कि कोई ऐसा करने की कोशिश नहीं कर रहा है, तब न्यायालय ने कहा, ‘‘(लेकिन) ऐसा तो लगता है।’’
न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने महाधिवक्ता से पूछा कि उसी जगह पर एक और स्टाल लगाने की इजाज़त कैसे दी गई, जहां माकपा ने बुक-स्टाल लगाने का प्रस्ताव दिया था।
न्यायालय ने पूछा कि क्या पश्चिम बंगाल की मौजूदा भाजपा सरकार ने ऐसे स्टॉल लगाने की व्यवस्था को सुव्यवस्थित किया है।
न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘ऐसी स्थिति में एक समान नियम होना चाहिए कि किसी को भी प्रशासन की अनुमति के बिना मुख्य मार्ग पर स्टॉल लगाने की इजाज़त नहीं दी जाएगी।’’
माकपा की ओर से वकील शमीम अहमद ने अदालत को बताया कि पार्टी ने बुकस्टॉल लगाने के बारे में अधिकारियों को सूचना दी थी।
उन्होंने दावा किया कि सूचना देने के बाद एक अक्टूबर को जब बांस का अस्थायी स्टॉल लगाया जा रहा था, तो हिंदू जागरण मंच के कथित सदस्यों ने उन्हें वहां से भगा दिया और अपना स्टॉल लगा लिया।
माकपा के वकील ने दावा किया कि शिकायत के बाद भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।
इस मामले पर उच्च न्यायालय में कल भी सुनवाई होगी।
भाषा राजकुमार अविनाश
अविनाश