नयी दिल्ली, 14 अक्टूबर (भाषा) दिल्ली की एक विशेष सीबीआई अदालत ने भ्रष्टाचार के एक मामले में बर्खास्त सरकारी अधिकारी को चार साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाते हुए कहा कि ऐसे मामलों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए ताकि समाज में कड़ा संदेश दिया जा सके।
विशेष न्यायाधीश छवि कपूर, नीरज खत्री को सजा सुनाने के संबंध में दलीलें सुन रही थीं। खत्री को पहले सरकारी कर्मचारी के रूप में आपराधिक कदाचार से जुड़े भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया गया था।
सीबीआई ने खत्री को अधिकतम सजा देने की मांग करते हुए दलील दी कि भ्रष्टाचार ‘‘समाज की प्रगति करने की इच्छाशक्ति को नष्ट कर देता है’’ और दोषी किसी भी तरह की नरमी का हकदार नहीं है।
खत्री के वकील ने नरमी बरतने की अपील करते हुए कहा कि वह रीढ़ की हड्डी की पुरानी बीमारी, लगातार पीठ दर्द और पैरों में सुन्नपन की समस्या से पीड़ित है। उन्होंने यह भी कहा कि खत्री को सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है और उनके पास अपने परिवार का भरण-पोषण करने का कोई ठोस साधन नहीं है।
अदालत ने छह अक्टूबर के अपने आदेश में कहा, ‘‘भ्रष्टाचार के मामलों से बहुत सख्ती से निपटा जाना चाहिए ताकि एक कड़ा संदेश दिया जा सके। उचित सजा देना वह तरीका है, जिसके माध्यम से अदालतें अपराधियों के खिलाफ न्याय की समाज की मांग का जवाब देती हैं।’’
अदालत ने गौर किया कि खत्री को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत सीबीआई के दो अन्य मामलों में भी दोषी ठहराया जा चुका है। हालांकि, उन मामलों में उनकी सजा निलंबित कर दी गई है। दिल्ली उच्च न्यायालय उन दोषसिद्धियों के खिलाफ खत्री की अपीलों पर सुनवाई कर रहा है।
अदालत ने कहा, ‘‘इस तरह, उसका पिछला रिकॉर्ड साफ-सुथरा नहीं कहा जा सकता। इसलिए, उनके प्रति नरमी बरतने और न्यूनतम सजा देने का कोई आधार नहीं है।’’
हालांकि, अदालत ने खत्री की उम्र और इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि उसे पहले ही सरकारी सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है उसे अधिकतम सात साल की सजा नहीं सुनाई।
भाषा प्रचेता रंजन
रंजन