बेंगलुरु, 14 अक्टूबर (भाषा) कर्नाटक के पुलिस महानिदेशक (जेल) आलोक कुमार ने इस बात पर नाराजगी जताई है कि कर्नाटक सरकार ने राज्य लोक सेवा आयोग (केपीएससी) में गड़बड़ियों की जांच के लिए उन्हें उच्च न्यायालय द्वारा विशेष जांच दल (एसआईटी) का प्रमुख बनाए जाने पर आपत्ति जताई थी। सरकारी सूत्रों यह जानकारी दी।
कर्नाटक की मुख्य सचिव शालिनी रजनीश को 5 अक्टूबर को लिखे एक पत्र में, कुमार ने उच्चतम न्यायालय में राज्य सरकार के उस बयान को ठीक करने के लिए तुरंत हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया, जिसमें दावा किया गया था कि उनके खिलाफ सीबीआई जांच चल रही है। कुमार ने इस दावे को तथ्यों के आधार पर गलत बताया।
कुमार ने दलील दी कि इस विवाद में बेवजह उनका नाम घसीटा गया और उनकी पेशेवर ईमानदारी और प्रतिष्ठा पर सवाल उठाए गए।
न्यायालय ने एक अक्टूबर को कर्नाटक उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसके तहत उनकी अध्यक्षता में एसआईटी का गठन किया गया था, और मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर के लिए तय की थी।
कुमार ने कहा, ‘‘माननीय उच्चतम न्यायालय के समक्ष (वरिष्ठ वकील) कपिल सिब्बल ने जो दलील पेश की, वे सरकारी रिकॉर्ड में मौजूद असल स्थिति के उलट हैं।’’ वह राज्य सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील की दलीलों का ज़िक्र कर रहे थे। वकील ने एसआईटी प्रमुख के तौर पर उनकी नियुक्ति का विरोध किया था।
इस विरोध की वजह यह बताई गई थी कि बेंगलुरु पुलिस आयुक्त के तौर पर उनके कार्यकाल के दौरान टेलीफोन-टैपिंग के आरोपों को लेकर सीबीआई की जांच जारी है।
भाषा सुभाष पवनेश
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