नयी दिल्ली, 14 अक्टूबर (भाषा) एस्ट्रानोवा मोबिलिटी की कर्ज देने वाली अनुषंगी इकाई नोवाफ्यूजन कैपिटल को गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) के रूप में काम करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से मंजूरी मिल गई है।
एस्ट्रानोवा मोबिलिटी के संस्थापक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) कुणाल मुंद्रा ने पीटीआई-भाषा को बताया कि कंपनी का अगले पांच साल में प्रबंधन के तहत परिसंपत्तियों (एयूएम) का आकार 5,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
मुंद्रा ने कहा, “इस एनबीएफसी की मदद से हमारा लक्ष्य अगले पांच साल में 5,000 करोड़ रुपये का वित्तपोषण उपलब्ध कराना है। यह मुख्य रूप से इलेक्ट्रिक वाहन के लिए होगा और केवल वाणिज्यिक परिचालकों को दिया जाएगा। यानी ऐसे सभी लोग, जो इन वाहनों और परिसंपत्तियों की मदद से अपनी आजीविका कमाते हैं।”
नोवाफ्यूजन कैपिटल की मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) श्रद्धा श्रीमल ने कहा कि कंपनी का ध्यान भारत में इलेक्ट्रिक वाहन की ओर बदलाव के लिए वित्तपोषण उपलब्ध कराने पर होगा।
उन्होंने कहा, “हमारा दायरा जलवायु के लिहाज से अनुकूल परिसंपत्तियों की विभिन्न श्रेणियों में है। हालांकि, हमारा मुख्य ध्यान इलेक्ट्रिक वाहन पर होगा, क्योंकि वाणिज्यिक परिवहन के क्षेत्र में बदलाव के लिहाज से हमें इसी में सबसे अधिक संभावनाएं दिखती हैं।”
श्रीमल ने कहा कि भारत में वाणिज्यिक वाहनों को इलेक्ट्रिक में बदलने के लिए करीब 100 अरब डॉलर की जरूरत होने का अनुमान है।
उन्होंने कहा कि इसके लिए केवल वाहन की खरीद को कर्ज देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्वच्छ परिवहन को बड़े पैमाने पर इन्हें अपनाने में मदद के लिए ऋण उपलब्ध कराने की एक नई व्यवस्था विकसित करना भी जरूरी है।
भाषा योगेश अजय
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