Breaking News

3 दिवसीय भारत दौरे पर पोलैंड के प्रधानमंत्री, आज पीएम मोदी से होगी मुलाकात     |   फ्रांस में जारी प्रदर्शनों के बीच भारतीय दूतावास ने नागरिकों के लिए जारी की एडवाइजरी     |   43 साल पुराने गैंगरेप केस में इलाहाबाद HC का फैसला, सबूतों के अभाव में 3 आरोपियों को किया बरी     |   मुंबई एयरपोर्ट पर करोड़ों की गोल्ड स्मगलिंग का पर्दाफाश, एयरपोर्ट कर्मचारी समेत 5 गिरफ्तार     |   सऊदी अरब के एयरपोर्ट पर हमला, एक की मौत और 8 घायल, कई फ्लाइट्स डायवर्ट     |  

न्यायालय ने पत्रकार को उप्र पुलिस की कठोर कार्रवाई से संरक्षण देने संबंधी आदेश को और पुख्ता किया

नयी दिल्ली, 14 अक्टूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने गाजियाबाद में दर्ज ‘रोडरेज’ के मामले में कठोर कार्रवाई से उस पत्रकार को संरक्षण देने संबंधी अपने पूर्व के आदेश को बुधवार को और पुख्ता कर दिया, जिन्होंने अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया था।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने गाजियाबाद पुलिस द्वारा सोशल मीडिया मंच 'एक्स' को 22 अगस्त को जारी किये गए उस नोटिस को भी रद्द कर दिया, जिसमें पत्रकार अभिषेक उपाध्याय के बारे में कुछ जानकारी और अन्य डिजिटल विवरण मांगे गए थे।

इस बात पर गौर करते हुए कि रोडरेज मामले में प्राथमिकी की एक प्रति उपाध्याय को दे दी गई है, पीठ ने उन्हें अधिकार क्षेत्र वाले उच्च न्यायालय में प्राथमिकी को चुनौती देने की छूट दी।

पीठ ने गाजियाबाद के पुलिस आयुक्त की ओर से दाखिल हलफनामे का अवलोकन किया, जिसमें कहा गया था कि 'एक्स' के नोडल अधिकारी को नोटिस जारी करके याचिकाकर्ता का पता लगाने के लिए जानकारी मांगी गई है, क्योंकि अगस्त में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद से उनका कुछ अता-पता नहीं चल पा रहा।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील प्रदीप राय ने कहा कि भले ही प्राथमिकी अगस्त में दर्ज की गई थी, लेकिन पुलिस ने 'एक्स' से एक जून से जानकारी उपलब्ध कराने को कहा।

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश हुए वकील से पीठ ने कहा, ‘‘आपने (एक्स) उन्हें तीन महीने पहले का डेटा देने का नोटिस दिया है। यह जरूरत से ज्यादा लग रहा है।’’

पीठ ने स्पष्ट कर दिया कि कथित अपराध होने से पहले की अवधि के लिए याचिकाकर्ता का कोई भी गोपनीय या व्यक्तिगत डेटा हासिल नहीं किया जा सकता।

न्यायालय ने कहा, ‘‘पुलिस की ओर से 'एक्स' को 22 अगस्त को जारी नोटिस को रद्द किया जाता है।’’

पीठ ने याचिकाकर्ता को यह छूट भी दी कि वह मामलों की जांच के दौरान पुलिस द्वारा व्यक्तिगत जानकारी जुटाने के लिए जरूरी दिशानिर्देश तय करने के अनुरोध को लेकर अदालत का रुख कर सकता है।

न्यायालय ने 25 अगस्त को याचिकाकर्ता को इस मामले में कठोर कार्रवाई से संरक्षण दिया था और निर्देश दिया था कि गाजियाबाद के इंदिरापुरम में दर्ज प्राथमिकी की एक प्रति उसे दी जाये।

याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में कहा कि उन्हें प्राथमिकी की प्रति नहीं दी गई और पुलिस आस-पास के दुकानदारों पर घटना के समय के सीसीटीवी फुटेज मिटाने के लिए दबाव डाल रही।

उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में कथित भ्रष्टाचार पर उनकी रिपोर्टिंग के सिलसिले में उन पर यह प्राथमिकी दर्ज की गई।

भाषा सुभाष देवेंद्र

देवेंद्र