नयी दिल्ली, 14 अक्टूबर (भाषा) भारत सितंबर में रूसी कच्चे तेल का दुनिया का सबसे बड़ा खरीदार बना रहा, लेकिन चीन की ओर से खरीद बढ़ने और आपूर्ति सीमित होने के कारण साल के मध्य के उच्चस्तर से इसका आयात घट गया। केप्लर के जहाजों की आवाजाही पर आधारित विश्लेषण में यह जानकारी दी गई है।
केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने सितंबर में रूस से प्रतिदिन करीब 18.2 लाख बैरल कच्चा तेल आयात किया, जबकि चीन का आयात लगभग 14.9 लाख बैरल प्रतिदिन रहा। भारत का आयात जून में 26 लाख बैरल और जुलाई में 25.7 लाख बैरल प्रतिदिन था। इस तरह जुलाई के स्तर से सितंबर में इसमें करीब 29 प्रतिशत की गिरावट आई। अगस्त में भारत ने प्रतिदिन 20.2 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल आयात किया था।
केप्लर के वरिष्ठ प्रबंधक (मॉडलिंग) सुमित रितोलिया ने कहा कि आयात में आई इस कमी को केवल अमेरिका की शुल्क संबंधी धमकियों के प्रति भारत की प्रतिक्रिया के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, “भारत के रूसी कच्चे तेल के आयात में हाल में आई कमी केवल अमेरिकी शुल्क दबाव का नतीजा नहीं है। इसकी सीमित उपलब्धता और चीन से बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने भी इसमें अहम भूमिका निभाई है।”
केप्लर के अनुसार, चीन की तेल शोधन कंपनियों ने हाल के महीनों में रूस से अधिक कच्चा तेल खरीदा है। इसकी एक वजह ईरान से कच्चे तेल की कम उपलब्धता भी है।
जहाजों की आवाजाही के मौजूदा आंकड़ों के आधार पर अक्टूबर में भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात प्रतिदिन 18-19 लाख बैरल रहने का अनुमान है, जो सितंबर के स्तर के आसपास होगा।
केप्लर ने कहा कि वेनेजुएला का कच्चा तेल भी इस साल भारत के आयात में फिर शामिल हुआ है। पिछले कुछ वर्षों में इसका आयात काफी कम रहा था, लेकिन अप्रैल से इसकी आपूर्ति बढ़ी है। हालांकि, वेनेजुएला के कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार अमेरिका बना हुआ है।
वेनेजुएला ने अगस्त में भारत को प्रतिदिन करीब 2.5 लाख बैरल और सितंबर में 2.57 लाख बैरल कच्चा तेल निर्यात किया। इसी अवधि में अमेरिका को निर्यात क्रमशः लगभग 4.52 लाख बैरल और 5.63 लाख बैरल प्रतिदिन रहा। भारत में पहुंचने के आधार पर देखें तो अगस्त में वेनेजुएला के कच्चे तेल का आयात करीब 2.87 लाख बैरल प्रतिदिन रहा।
केप्लर ने कहा कि समुद्री यात्रा में लगने वाले समय के कारण निर्यात और भारत पहुंचने वाले तेल के आंकड़ों में अंतर होता है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज की जामनगर रिफाइनरी वेनेजुएला के कच्चे तेल की भारत में मुख्य खरीदार है और रिफाइनरी की क्षमता एवं संरचना को देखते हुए आगे भी इसके प्रमुख खरीदार बने रहने की उम्मीद है।
रितोलिया ने कहा, “वेनेजुएला के भारी और अत्यधिक भारी श्रेणी के कच्चे तेल का प्रसंस्करण अपेक्षाकृत कठिन है और भारत की सभी रिफाइनरियां इसके लिए उपयुक्त नहीं हैं। रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी इस तरह के कच्चे तेल के प्रसंरस्कण के लिए विशेष रूप से अनुकूल है। इसी वजह से वहां इसका लगातार प्रसंस्करण होता दिखाई देता है।”
भाषा योगेश अजय
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