(फोटो के साथ)
चंडीगढ़, 14 अक्टूबर (भाषा) पंजाब के मानसा जिले में प्रशासन ने नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह उर्फ झोटा की हत्या के आरोपी अश्वनी कुमार के मकान का एक हिस्सा बुधवार को ढहा दिया तथा इस दौरान भीड़ ने उसके मेडिकल स्टोर में तोड़फोड़ कर आग लगा दी। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
मानसा के वीर नगर इलाके में बुधवार को जब खुदाई करने वाली मशीन से अश्वनी कुमार के मकान का अगला हिस्सा ढहाया जा रहा था, तब हंगामापूर्ण स्थिति नजर आयी। इस दौरान निहंगों सहित गुस्साई भीड़ ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में मकान के ढहाए गए हिस्से के मलबे को भी और तोड़ना शुरू कर दिया। वहां बड़ी संख्या में मौजूद लोगों ने इस घटना के वीडियो बनाए और नारे लगाकर अपना समर्थन जताया।
भीड़ ने कुमार के उस मेडिकल स्टोर में भी लाठी-डंडों और पत्थरों से तोड़फोड़ की, जहां मंगलवार को झोटा को गोली मारी गई थी। लोगों ने आरोपी के खिलाफ नारे लगाए। भीड़ ने दुकान में तोड़फोड़ करने के बाद उसमें आग लगा दी।
मकान ढहाये जाने की कार्रवाई देखने के लिए लोग आसपास के घरों की चारदीवारी पर भी चढ़ गए। भारी पुलिस बल की तैनाती के बावजूद भीड़ ने जमकर हंगामा किया।
प्रशासन ने कहा कि कुमार के मकान में अवैध निर्माण की जानकारी मिलने के बाद उसे ढहाने की कार्रवाई की गई।
नशीले पदार्थों की लत और दवा की दुकानों पर उनकी अवैध बिक्री के खिलाफ आवाज उठाने वाले झोटा को मंगलवार को मानसा के व्यस्त बाजार में दिनदहाड़े गोली मार दी गई थी।
आरोप है कि झोटा और उनके साथियों ने एक बुजुर्ग व्यक्ति को नशीले पदार्थ बेचने को लेकर मेडिकल स्टोर के मालिक कुमार से सवाल किए थे, जिसके बाद कुमार ने उन पर गोली चला दी। यह घटना उस समय हुई, जब झोटा फेसबुक पर सीधा प्रसारण कर रहे थे।
पुलिस ने बताया कि कुमार को राजस्थान के सालासर से हिरासत में ले लिया गया है।
इस घटना के बाद मानसा में तनाव फैल गया। झोटा के समर्थकों ने मेडिकल स्टोर में तोड़फोड़ की । उनके परिवार ने भी विरोधस्वरूप शव का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया।
पुलिस ने मंगलवार को कुमार के उस सहयोगी को गिरफ्तार किया था, जिसने उसे भगाने में मदद की थी।
विपक्षी नेताओं ने हत्या की इस घटना की निंदा की और राज्य में कानून-व्यवस्था ‘‘चरमराने’’ तथा ‘‘जंगलराज’’ होने का आरोप लगाते हुए आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार की आलोचना की।
उन्होंने कहा कि झोटा की हत्या से पंजाब में नशे की समस्या के खिलाफ आवाज उठाने वालों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
भाषा सिम्मी राजकुमार
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