नयी दिल्ली, 14 अक्टूबर (भाषा) राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने चिकित्सा रिकॉर्ड की दूरस्थ समीक्षा और प्रमाणीकरण के लिए डिजिटल एवं इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षरों के इस्तेमाल को लेकर एक परामर्श जारी किया है। इसका उद्देश्य मौजूदा कानूनी प्रावधानों को समान तरीके से लागू करना और डिजिटल स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों को जिम्मेदारी से अपनाने को बढ़ावा देना है।
एनएमसी ने 13 अक्टूबर को जारी एक सार्वजनिक सूचना में कहा कि विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में अलग-अलग तरीके अपनाए जाने के कारण चिकित्सा रिकॉर्ड की दूरस्थ समीक्षा और प्रमाणीकरण को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई थी।
एनएमसी सचिव डॉ. राघव लैंगर की ओर से जारी यह नोटिस राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभागों, चिकित्सा शिक्षा निदेशकों, राज्य चिकित्सा परिषदों तथा मेडिकल कॉलेज एवं संस्थानों को भेजा गया है।
नोटिस के मुताबिक, गैर-वित्तीय नियामक सुधारों पर उच्चस्तरीय समिति ने भी सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के अनुरूप चिकित्सा कार्यों में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षरों के इस्तेमाल को सुगम बनाने की सिफारिश की थी।
नोटिस में कहा गया है कि इस सिफारिश का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता को सुगम बनाना, उनकी पहुंच में सुधार करना और नियामकीय प्रक्रियाओं में आने वाली उन बाधाओं को कम करना है, जिनसे बचा जा सकता है।
इसमें कहा गया है कि चिकित्सा रिकॉर्ड के दूरस्थ प्रमाणीकरण को लेकर अस्पष्टता दूर करने, मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, पेशेवर जवाबदेही बनाए रखने और डिजिटल स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों को जिम्मेदारी से अपनाने को बढ़ावा देने के लिए यह परामर्श जारी किया गया है।
एनएमसी ने सभी पंजीकृत चिकित्सा पेशेवरों और अन्य संबंधित पक्षों को परामर्श में दिए गए प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित करने की सलाह दी है।
भाषा पारुल रंजन
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