नयी दिल्ली, 14 अक्टूबर (भाषा) बैंक ऑफ बड़ौदा (बॉब) ने बुधवार को कहा कि उसे संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के कारोबारी बी आर शेट्टी की ओर से दायर किसी मुकदमे का नोटिस नहीं मिला है। खबरों के मुताबिक, शेट्टी ने अपने कारोबारी समूह के पतन के मामले में बैंक से 15 अरब अमेरिकी डॉलर के क्षतिपूर्ति की मांग की है।
बैंक ने कहा कि मुकदमे का नोटिस मिलने पर वह अपना पक्ष मजबूती से रखेगा और अपने हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा।
खबरों के अनुसार, शेट्टी ने 13 अक्टूबर को बंबई उच्च न्यायालय में मुकदमा दायर कर क्षतिपूर्ति की मांग की। एनएमसी हेल्थ के संस्थापक शेट्टी ने कथित तौर पर आरोप लगाया है कि बैंक ऑफ बड़ौदा, उसके कई अधिकारियों और अन्य लोगों ने ऐसे लेनदेन में मदद की, जिनके कारण उनका कारोबारी समूह ढह गया।
यूएई की स्वास्थ्य सेवा कंपनी एनएमसी हेल्थ को 2020 में दिवालिया घोषित कर दिया गया था। उस समय पता चला था कि कंपनी ने चार अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का कर्ज छिपाया था। बैंक ऑफ बड़ौदा के अलावा अबू धाबी कमर्शियल बैंक, अबू धाबी इस्लामिक बैंक, दुबई इस्लामिक बैंक और अमीरात एनबीडी सहित कई अन्य बैंक भी कंपनी के ऋणदाता थे।
बैंक ने शेयर बाजार को दी गई सूचना में कहा कि उसे अभी तक इस मुकदमे का नोटिस नहीं मिला है, इसलिए वह अदालत में अभी तक परखे नहीं गए आरोपों पर टिप्पणी नहीं कर सकता। बैंक ने कहा कि नोटिस मिलने पर वह मुकदमे का मजबूती से बचाव करेगा और अपने हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा।
इससे पहले जुलाई में बैंक ऑफ बड़ौदा ने बताया था कि उसने एनएमसी हेल्थ पीएलसी, एनएमसी हेल्थकेयर लिमिटेड और एनएमसी होल्डिंग लिमिटेड के साथ अदालत के बाहर समझौता किया है। इस समझौते के तहत बैंक की अबू धाबी शाखा के माध्यम से 60 करोड़ अमेरिकी डॉलर (करीब 5,700 करोड़ रुपये) का भुगतान किया गया था।
बैंक के अनुसार, यह मामला एनएमसी हेल्थ पीएलसी, एनएमसी होल्डिंग लिमिटेड और एनएमसी हेल्थकेयर लिमिटेड से जुड़ा था। इन कंपनियों के संबंध में अबू धाबी ग्लोबल मार्केट (एडीजीएम) और ब्रिटेन के दिवाला कानूनों के तहत कार्यवाही की गई थी। मामला संयुक्त अरब अमीरात के दीवानी कानून से भी संबंधित था।
कभी खाड़ी क्षेत्र की सबसे बड़ी निजी स्वास्थ्य सेवा कंपनी रही एनएमसी हेल्थ 2020 में प्रशासनिक निगरानी के अधीन आ गई थी। उस समय कंपनी पर अरबों डॉलर का ऐसा कर्ज होने का पता चला था, जिसका पहले खुलासा नहीं किया गया था।
इसके बाद कंपनी के संयुक्त प्रशासकों ने एनएमसी के संस्थापक बी आर शेट्टी, पूर्व मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) प्रशांत मंगत और बैंक ऑफ बड़ौदा के खिलाफ अबू धाबी और इंग्लैंड में कानूनी कार्यवाही शुरू की थी। यह कार्यवाही एडीजीएम और ब्रिटेन के दिवाला कानूनों के साथ-साथ यूएई के दीवानी कानून के तहत की गई थी।
भाषा योगेश अजय
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