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चीन के साथ संबंध फिर से मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है भारत: पीयूष गोयल

(फाइल फोटो के साथ)

नयी दिल्ली, 14 अक्टूबर (भाषा) वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को कहा कि भारत, चीन के साथ अपने संबंधों को फिर से मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है, लेकिन इस यात्रा का अंतिम पड़ाव अभी तय नहीं हुआ है।

उन्होंने साथ ही कहा कि भारत किसी भी देश के साथ संयुक्त उद्यम के लिए तैयार है, बशर्ते उसे उचित शर्तों पर समझौता मिले।

गोयल ने यहां ‘ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम’ में कहा, ‘‘हम दुनिया के सभी देशों के साथ काम करने के लिए तैयार हैं, बशर्ते हमें उचित शर्तों पर समझौता मिले, आपसी संपर्क एवं सहयोग में निरंतरता बनी रहे और भू-राजनीतिक स्थिति खराब न हो। मुझे लगता है कि अतीत में हमारी कुछ चिंताएं थीं। हम चीन के साथ एक बार फिर संबंध बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं लेकिन इस यात्रा का अंतिम पड़ाव अभी तय नहीं हुआ है।’’

गोयल की ये टिप्पणियां महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि चीन, भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार वित्त वर्ष 2025-26 में 7.9 प्रतिशत बढ़कर 127.7 अरब डॉलर हो गया, जो 2024-25 में 118.39 अरब डॉलर था।

वित्त वर्ष 2025-26 में चीन को भारत का निर्यात 36.62 प्रतिशत बढ़कर 19.47 अरब डॉलर हो गया, जबकि 2024-25 में यह 14.25 अरब डॉलर था। दूसरी ओर, इस अवधि में आयात 16 प्रतिशत बढ़कर 131.62 अरब डॉलर हो गया।

गत वित्त वर्ष में भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 99.19 अरब डॉलर हो गया, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 85 अरब डॉलर था। यह देश के लिए चिंता का विषय है।

चीन से निवेश को लेकर भी मुद्दे हैं। भारत ने चीन के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के लिए नियम सख्त किए हैं।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 12 सितंबर, 2026 को ‘ब्रिक्स शिखर सम्मेलन’ से इतर चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग से मुलाकात भी की थी।

मौजूदा भू-राजनीतिक चुनौतियों पर गोयल ने कहा, ‘‘हर किसी ने मित्र देशों के महत्व को समझा है और आने वाले वर्षों में यह सबसे महत्वपूर्ण पहलू होगा।’’

कोविड-19 वैश्विक महामारी के दौर को याद करते हुए मंत्री ने कहा कि कई देशों ने जरूरी सामान की आपूर्ति करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद भारत ने आत्मनिर्भरता पर ध्यान केंद्रित किया।

उन्होंने कहा कि कोविड के दौरान भारत ने 100 से अधिक देशों को खाद्यान्न सामग्री और टीके उपलब्ध कराए, लेकिन ‘‘हमने पाया कि ज्यादातर देशों ने हमें बुरी तरह निराश किया।’’

उन्होंने कहा, ‘‘कोविड के दौरान हमें वास्तव में यह एहसास हुआ कि आपूर्ति श्रृंखला टूटने पर भारत जैसे 1.4 अरब की आबादी वाले बड़े देश को कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। महामारी के दौरान हमें अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए पर्याप्त सामग्री नहीं मिली। हमने व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों, कोविड किट या टीकों के लिए जहां भी ऑर्डर दिए, वहां सभी देशों ने हमें बुरी तरह निराश किया।’’

गोयल ने कहा, ‘‘जब हमें फाइजर और मॉडर्ना के टीकों की जरूरत थी, तब पश्चिमी देशों ने उन्हें देने से इनकार कर दिया... उन्होंने भारतीय बाजार में टीके लाने के लिए आवेदन करने से भी इनकार कर दिया, जबकि हम सभी शर्तों में छूट देने को तैयार थे। इसलिए यह एक वैश्विक समस्या है।’’

गोयल ने कहा कि इस अनुभव के जवाब में ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ का आह्वान किया।

इस बीच, ‘फोरम’ में सिंगापुर के उप प्रधानमंत्री और ऊर्जा, व्यापार एवं उद्योग मंत्री गान किम योंग ने कहा कि सिंगापुर, भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग को मजबूत करने के लिए बातचीत कर रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम भारतीय कार्यबल को प्रशिक्षण देने और उनके कौशल विकास पर भी काम कर रहे हैं, ताकि सेमीकंडक्टर क्षेत्र के विकास में सहयोग कर सकें।’’

भारत और सिंगापुर के बीच व्यापार समझौता 2005 में लागू हुआ था।

भाषा निहारिका अजय

अजय