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आतंकवाद का वित्तपोषण: यासीन मलिक की पेशी न होने पर उच्च न्यायालय ने जेल प्रशासन से मांगी रिपोर्ट

नयी दिल्ली, 14 अक्टूबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने आतंकवाद के वित्तपोषण के एक मामले में अलगाववादी नेता यासीन मलिक की जेल से पेशी न होने पर बुधवार को जेल अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है।

न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति अरुण भारद्वाज की पीठ ने कहा कि मलिक को अदालत के समक्ष ऑनलाइन माध्यम से पेश किया जाना था।

पीठ ने कहा, ‘‘प्रतिवादी (मलिक) को हमारे समक्ष ऑनलाइन माध्यम से पेश किया जाना था। हालांकि, ऐसा नहीं किया गया। इस संबंध में संबंधित जेल अधीक्षक से रिपोर्ट मांगी जाए।’’

जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) का प्रमुख मलिक फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद है, जहां वह इस मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है।

उच्च न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख नौ दिसंबर तय की है। उसने निर्देश दिया है कि उस दिन मलिक को ऑनलाइन माध्यम से कार्यवाही में शामिल कराया जाए।

उच्च न्यायालय राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें उसने आतंकवाद के वित्तपोषण मामले में मलिक के लिए मृत्युदंड का अनुरोध किया है।

मलिक ने इससे पहले कहा था कि वह अपनी सजा को उम्रकैद से बढ़ाकर मृत्युदंड करने की एनआईए की याचिका के खिलाफ अदालत में खुद बहस करना चाहता है।

उच्च न्यायालय ने 29 मई 2023 को एनआईए की याचिका पर मलिक को नोटिस जारी किया था और अगली तारीख पर उसे पेश किए जाने का निर्देश दिया था।

इसके बाद, जेल अधिकारियों ने यह कहते हुए उसकी ऑनलाइन मध्यम से पेशी की अनुमति के लिए एक आवेदन दायर किया था कि वह एक ‘‘बेहद खतरनाक कैदी’’ है और कानून-व्यवस्था व सुरक्षा बनाए रखने के लिए उसे अदालत में प्रत्यक्ष पेश नहीं किया जाना जरूरी नहीं है। उच्च न्यायालय ने इस अनुरोध को स्वीकार कर लिया था।

वर्तमान मामले में, यहां की एक अधीनस्थ अदालत ने 24 मई 2022 को मलिक को विधि-विरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत अपराधों का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

भाषा खारी वैभव

वैभव