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मिजोरम आने वाले समय में भूटान की तरह जिम्मेदार पर्यटकों को आकर्षित करना चाहता है : मंत्री

(त्रिदीप लहकार)

आइजोल, 14 अक्टूबर (भाषा) मिजोरम अगले पांच से 10 साल में भूटान के पर्यटन मॉडल को अपनाने का लक्ष्य लेकर चल रहा है जिसके तहत राज्य में अधिक खर्च करने वाले और जिम्मेदारी से पर्यटन करने वाले पर्यटकों को आकर्षित करने के साथ ही उन पर पाबंदियां भी लगाई जाएंगी। राज्य के पर्यटन मंत्री लालंगहिंगलोवा हमार ने यह बात कही।

उन्होंने कहा कि पर्यटन की संभावनाओं और समाज पर इसके प्रभाव का आकलन करने के लिए राज्य सरकार मिजोरम विश्वविद्यालय से अध्ययन कराने की योजना बना रही है। अध्ययन के निष्कर्षों के आधार पर आगे कदम उठाए जाएंगे।

हमार ने मंगलवार को ‘मिजोरम ट्रैवल फेस्ट-2026’ में संवाददाता सम्मेलन में कहा, “मिजोरम यात्रा के लिहाज से एक अनूठी जगह है और हम अधिक पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए पर्यटन को बढ़ावा दे रहे हैं। हालांकि, पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों की तुलना में हमने इस क्षेत्र में देर से शुरुआत की है और अब उनकी बराबरी करने की कोशिश कर रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पर्यटन के प्रचार के लिए अपने पड़ोसी राज्यों की तरह किसी सेलिब्रिटी को ब्रांड एंबेसडर नहीं बनाएगी, बल्कि इस क्षेत्र के स्वाभाविक विकास पर जोर देगी।

हमार ने कहा, “भविष्य में हम भूटान की तरह बनना चाहेंगे, जहां कई तरह की पाबंदियां हों और अधिक खर्च करने वाले तथा संवेदनशील पर्यटकों का स्वागत किया जाए। ऐसा निकट भविष्य में शायद न हो, लेकिन अगले पांच से 10 साल में हम उस दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।”

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार इस संबंध में मिजोरम विश्वविद्यालय से पहले ही बातचीत कर चुकी है और पर्यटन के प्रभावों का अध्ययन कराने के लिए उसके साथ औपचारिक समझौता किया जाएगा।

मंत्री ने कहा, “हम यह जानना चाहते हैं कि बड़ी संख्या में पर्यटकों के आने का मिजो समाज पर आर्थिक, सामाजिक और अन्य किस तरह का प्रभाव पड़ता है। पर्यटन के क्षेत्र में हम अभी शुरुआती चरण में हैं। हम बहुत सावधानी से आगे बढ़ना चाहते हैं, ताकि अपनी संस्कृति, पहचान और समुदायों की रक्षा कर सकें।”

मेघालय में हाल में कुछ स्थानीय लोगों द्वारा पर्यटकों पर कथित हमले किए जाने के बारे में पूछे जाने पर हमार ने कहा कि पर्यटन के सकारात्मक और नकारात्मक, दोनों पहलू हैं।

उन्होंने कहा, “हमने 2026 में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान नहीं चलाने का फैसला किया है। इस साल हमारा ध्यान स्थानीय समुदायों को पर्यटकों के व्यवहार और मेहमानों के साथ पेश आने के तरीके के बारे में जागरूक करने पर है। अभी मैं निश्चित रूप से नहीं कह सकता, लेकिन भविष्य में पर्यटकों की संख्या बहुत अधिक होने पर हमें भी ऐसी ही स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।”

हमार ने दावा किया कि मिजोरम देश का सबसे शांतिपूर्ण राज्य है और सरकार शांति को पर्यटकों के लिए राज्य की विशिष्ट पहचान के रूप में पेश करना चाहती है।

उन्होंने कहा, “हमें हाल में शांति दीर्घा शुरू करने के लिए छह करोड़ रुपये मिले हैं और इस पर काम चल रहा है। हमें थेंज़ॉल से शांति महोत्सव आयोजित करने का प्रस्ताव भी मिला है। धनराशि मिलते ही हम निश्चित रूप से इसका आयोजन करेंगे।”

हमार ने यह भी कहा कि आगामी शीतकालीन महोत्सव के दौरान विदेशी पर्यटकों के लिए मिजोरम आना आसान बनाने के वास्ते राज्य के मुख्यमंत्री केंद्र सरकार से संरक्षित क्षेत्र परमिट (पीएपी) के नियमों में ढील देने का अनुरोध करेंगे।

मिजोरम आने वाले विदेशी नागरिकों के लिए आधिकारिक ई-एफआरआरओ पोर्टल के माध्यम से पीएपी प्राप्त करना अनिवार्य है, जबकि राज्य में प्रवेश करने वाले भारतीय नागरिकों के लिए इनर लाइन परमिट (आईएलपी) जरूरी यात्रा दस्तावेज है।

भाषा

मनीषा वैभव

वैभव