बेंगलुरु, 13 अक्टूबर (भाषा) बेंगलुरु की एक अदालत ने कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया की उस याचिका पर मंगलवार को अंतरिम रोक का आदेश जारी किया जिसमें उन्होंने एक ऐसे वीडियो के प्रकाशन और प्रसार पर रोक लगाने की मांग की थी, जो उनके मुताबिक मानहानिपूर्ण था।
19वें अतिरिक्त नगर दीवानी एवं सत्र न्यायाधीश, बी. पुष्पांजलि ने एकतरफा अंतरिम आदेश जारी किया। इस आदेश में प्रतिवादियों को किसी भी माध्यम से उस वीडियो को प्रसारण, पुन: प्रसारण, प्रकाशन, अपलोड, ट्रांसमिट, प्रसार, साझा करने या किसी अन्य तरीके से प्रसारित करने से रोक दिया गया।
आदेश में कहा गया, “प्रतिवादियों के विरुद्ध अंतरिम अवधि के लिए एकपक्षीय अस्थायी निषेधाज्ञा आदेश जारी करें, जिसके द्वारा उन्हें, उनके स्वामियों, संपादकों, निदेशकों, अधिकारियों, कर्मचारियों, अभिकर्ताओं, प्रतिनिधियों, निर्देश पर काम करने वालों तथा उनके माध्यम से या उनके अधीन दावा करने वाले सभी व्यक्तियों को किसी भी प्रकार या किसी भी माध्यम से विवादित वीडियो का प्रसारण, पुनः प्रसारण, प्रकाशन, पुनः प्रकाशन, अपलोड, ट्रांसमिट, प्रसार, साझा करना, होस्ट करना या अन्यथा प्रसार करने से रोका जाए।”
सिद्धरमैया ने कहा कि उन्होंने उनके खिलाफ चलाए जा रहे “दुष्प्रचार” के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
उनके बेटे और कर्नाटक के मंत्री यतींद्र सिद्धरमैया ने वीडियो को फर्जी बताते हुए खारिज कर दिया और आरोप लगाया कि इसका मकसद उनके पिता की छवि को खराब करना है।
सिद्धरमैया ने एक बयान में कहा वीडियो के प्रसारण पर रोक लगाने के लिए उन्होंने बेंगलुरु दीवानी और सत्र न्यायालय का रुख किया है तथा निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए नगर पुलिस आयुक्त के पास शिकायत दर्ज कराई है।
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने पाया है कि मेरा नाम एक स्टिंग ऑपरेशन वीडियो से जोड़ा जा रहा है, जिसका पिछले कुछ दिनों से अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसार हो रहा है और मेरे खिलाफ दुष्प्रचार अभियान चलाया जा रहा। यह साफ तौर पर राजनीतिक द्वेष के कारण मेरी छवि खराब करने की कोशिश प्रतीत होती है।’’
सिद्धरमैया ने कहा कि वीडियो से उनका कोई संबंध नहीं है और उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग इसका इस्तेमाल उन्हें बदनाम करने के लिए कर रहे हैं।
कांग्रेस नेता ने मीडिया और आम लोगों से इस दुष्प्रचार अभियान में शामिल न होने का आग्रह किया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्नाटक के लोग उनके पांच दशक लंबे राजनीतिक करियर से अच्छी तरह वाकिफ हैं, जिसे उन्होंने एक खुली किताब बताया। उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, आधुनिक प्रौद्योगिकी के इस दौर में झूठ को सच के तौर पर पेश करना आसान हो गया है।’’
सिद्धरमैया ने कहा, ‘‘इसी संदर्भ में मैंने एहतियाती कदम के तौर पर अदालत का रुख किया है। इसके अलावा, मुझे किसी बात का डर नहीं है। मुझे भरोसा है कि आखिरकार सच की ही जीत होगी।’’
उन्होंने कहा कि वह अभिव्यक्ति की आजादी का पुरज़ोर समर्थन करते हैं और उन्होंने कभी भी मीडिया को इसका उपयोग करने से नहीं रोका।
उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, कुछ मीडिया संस्थानों द्वारा इस आजादी के गलत इस्तेमाल को देखते हुए, हालात ने मुझे मजबूर किया है कि मैं अदालत से उस वीडियो के प्रसारण पर रोक लगाने का आदेश लूं। मुझे अफसोस है कि ऐसी स्थिति आ गई है।’’
सोमवार रात पत्रकारों से बात करते हुए सिद्धरमैया ने कहा, ‘‘सोशल मीडिया पर मेरे खिलाफ दुष्प्रचार किया जा रहा। इसलिए, मैं रोक लगाने का आदेश जारी करने का अनुरोध कर रहा हूं।'
यतींद्र ने बताया कि वीडियो का प्रसार करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए शिकायत दायर की गई है।
उन्होंने कहा, ‘‘वे दुष्प्रचार कर रहे हैं। क्या हम हाथ पर हाथ धरे बैठे रह सकते हैं?’’ उन्होंने कहा कि जो लोग असलियत नहीं जानते, वे शायद इस वीडियो को असली मान लें।
यतींद्र ने इस बात को खारिज कर दिया कि यह वीडियो कोई स्टिंग ऑपरेशन था। उन्होंने कहा, ‘‘यह कोई स्टिंग ऑपरेशन नहीं, बल्कि दुष्प्रचार करने और छवि खराब करने की साजिश है।’’
यह पूछे जाने पर कि क्या राजनीति ऐसे दौर में प्रवेश कर गई है कि नेताओं को अदालत के हस्तक्षेप की जरूरत पड़ रही है, तो यतींद्र ने कहा कि सिद्धरमैया जैसे बड़े नेता पर भी झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘आज राजनीतिक हालात इतने बदतर हो गए हैं कि सिद्धरमैया जैसे वरिष्ठ नेता को भी ऐसे झूठे आरोपों का सामना करना पड़ रहा है।’’
यतींद्र ने बताया कि वीडियो सामने आते ही उनके पिता ने उन्हें इस बारे में जानकारी दी थी और कहा था कि वे शिकायत दायर करना चाहते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने उनसे कहा कि वे कानूनी सलाह लेने के बाद शिकायत दायर करें।’’
उनसे जब पूछा गया कि क्या इन घटनाओं के कारण वह व्यवस्था से निराश हुए हैं, तो यतींद्र ने कहा कि अगर किसी ने कुछ गलत नहीं किया है, तो बुरा महसूस करने की कोई वजह नहीं है।
मंत्री ने कहा, ‘‘बुरा तभी लगना चाहिए, जब किसी ने कुछ गलत किया हो।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हम व्यवस्था का क्या कर सकते हैं? आज व्यवस्था बदहाल है। राजनीति में आने के बाद, जो कुछ भी सामने आए, उसका सामना करना ही पड़ता है।’’
भाषा प्रशांत सुरभि
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