(अपराजिता उपाध्याय)
नयी दिल्ली, 13 अक्टूबर (भाषा) भारतीय मुक्केबाजी संघ (बीएफआई) में अंदरूनी कलह मंगलवार को और बढ़ गई जब महासचिव प्रमोद कुमार ने अध्यक्ष अजय सिंह और कार्यकारी निदेशक कर्नल अरुण मलिक पर सिंह के खिलाफ प्रस्तावित अविश्वास प्रस्ताव को रोकने के लिए ‘‘आपराधिक धमकी’’ देने का आरोप लगाया। हालांकि, मलिक ने इन आरोपों को ‘‘बेबुनियाद’’ करार दिया है।
मलिक ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, ‘‘ये सभी आरोप बेबुनियाद और गलत हैं। हमने ऐसा कुछ नहीं किया है।’’
कुमार ने 13 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखे गए एक पत्र में संघ में ‘‘गंभीर प्रशासनिक संकट’’ का आरोप लगाया। पत्र की एक प्रति 'पीटीआई-भाषा' के पास है।
उन्होंने पत्र में दावा किया कि संबद्ध राज्य इकाइयों और कार्यकारी समिति के अधिकांश सदस्यों ने सिंह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की मांग करते हुए औपचारिक अनुरोध प्रस्तुत किए थे।
कुमार ने लिखा, “बीएफआई के विधिवत चुने गए महासचिव के तौर पर, मैं संघ के संविधान के तहत इन मांगों का सम्मान करने और उसकी सदस्य इकाइयों के लोकतांत्रिक जनादेश का पालन करने के लिए बाध्य हूं।”
उन्होंने आरोप लगाया कि सिंह, मलिक के जरिए संघ के रोजमर्रा के कामकाज को चला रहे हैं और ‘‘कानूनी अधिकार के बिना’’ निर्देश जारी कर रहे हैं।
कुमार ने कहा, ‘‘खेल प्रशासन के बुनियादी सिद्धांत और प्राकृतिक न्याय के नियमों के अनुसार, अविश्वास प्रस्ताव का सामना कर रहे पदाधिकारी को उस प्रक्रिया को विफल करने या बाधित करने के लिए कार्यकारी शक्तियों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।’’
उन्होंने लिखा, “वे मुझे और राज्य से जुड़ी इकाइयों को धमकी देकर आपराधिक डराने-धमकाने का तरीका अपना रहे हैं और मुझे मेरी संवैधानिक ज़िम्मेदारियां निभाने से रोकने की कोशिश में रोजाना अनधिकृत नोटिस भेज रहे हैं।”
कुमार ने आगे आरोप लगाया कि प्रस्ताव का समर्थन करने वाले राज्य संघों को निलंबित करने और तदर्थ समितियां नियुक्त करने की धमकियां दी जा रही थीं।
कुमार ने कहा, “मेरे ऑफिस का कामकाज ठप करने और सरकारी काम में बाधा डालने की कोशिश में, मेरी जानकारी या सहमति के बिना अचानक मेरा संघ का ईमेल बंद कर दिया गया।”
कुमार ने लिखा, “दुश्मनी इतनी बढ़ गई है कि मुझे अपनी निजी सुरक्षा की भी गहरी चिंता है। अगर मुझे कोई शारीरिक नुकसान पहुंचता है, तो अजय सिंह और कर्नल (सेवानिवृत्त) अरुण मलिक को उस नुकसान के लिए सीधे तौर पर ज़िम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।”
हालांकि, मलिक ने इस बात से इनकार किया कि कुमार का ईमेल एक्सेस बंद कर दिया गया था।
उन्होंने कहा, “किसी ने भी उनका ईमेल बंद नहीं किया है। वे इसकी जांच करवा सकते हैं, हमें कोई दिक्कत नहीं है।”
भाषा प्रचेता प्रशांत
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