कोलकाता, 13 अक्टूबर (भाषा) पूर्व निर्वाचन आयुक्त अशोक लवासा ने मंगलवार को कहा कि निर्वाचन आयोग का विवादों में घिरना अभूतपूर्व है।
उन्होंने आयोग को जनता का भरोसा फिर से जीतने की सलाह दी और क्रिकेट का उदाहरण देते हुए चेतावनी दी कि “अगर लोगों को लगे कि अंपायर निष्पक्ष नहीं था”, तो किसी टीम की जीत पर भी सवाल उठ सकते हैं।
पिछले कुछ दिनों में एकजुट विपक्ष ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया और राष्ट्रीय राजधानी में पुलिस के साथ उसकी झड़प भी हुई। वे कथित “वोट चोरी” के खिलाफ अपना विरोध तेज कर रहे हैं और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
यह घटनाक्रम 'इंडियन एक्सप्रेस' की एक खबर के बाद सामने आया है, जिसमें कहा गया है कि निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार उन फैसलों और आदेशों पर आधिकारिक तौर पर आपत्ति जताई थी, जो उनकी जानकारी के बिना जारी किए गए थे, जबकि एसआईआर का राष्ट्रीय स्तर पर क्रियान्वयन पूरे आयोग की देखरेख में हो रहा था।
कोलकाता में एक सम्मेलन को डिजिटल माध्यम से संबोधित करते हुए लवासा ने कहा, “मुझे लगता है कि यह लोकतंत्र के लिए बहुत दुर्भाग्यपूर्ण और खतरनाक है, क्योंकि लोकतंत्र में आपको एक अंपायर की जरूरत होती है।”
पूर्व निर्वाचन आयुक्त ने कहा, “अगर लोगों को लगता है कि अंपायर निष्पक्ष नहीं है, तो वे जीतने वाली टीम की जीत पर भी सवाल उठाएंगे।”
भाषा राखी प्रशांत
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