नयी दिल्ली, 13 अक्टूबर (भाषा) भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लाने वाली कंपनियों को नए शेयरों के निर्गम का आकार 50 प्रतिशत तक घटाने या बढ़ाने की छूट की अवधि बढ़ा दी है। भारत के निवेश बैंकर संघ (एआईबीआई) ने मंगलवार को एक बयान में यह जानकारी दी।
इस छूट के तहत कंपनियों को संशोधित निर्गम आकार के लिए नए सिरे से मसौदा प्रस्ताव दस्तावेज दाखिल नहीं करना होगा। यह छूट उन आईपीओ पर लागू होगी, जो 31 मार्च, 2027 तक खुलेंगे।
इस कदम का उद्देश्य कंपनियों के लिए पूंजी जुटाने की प्रक्रिया आसान बनाना है।
इससे पहले यह छूट 30 सितंबर, 2026 तक दाखिल किए गए दस्तावेजों के मसौदे (डीआरएचपी) पर लागू थी।
निवेश बैंकरों के उद्योग संगठन एआईबीआई ने कहा कि इस फैसले से कंपनियों और मर्चेंट बैंकर को कारोबारी जरूरतों और बाजार की बदलती परिस्थितियों के अनुरूप फैसले लेने में अधिक लचीलापन मिलेगा।
एआईबीआई के अनुसार, इस छूट से आईपीओ लाने में मदद मिली है और जुलाई-सितंबर तिमाही में बड़े पैमाने पर पूंजी जुटाई गई।
इस तिमाही में मुख्य बोर्ड के 69 आईपीओ से 90,482 करोड़ रुपये जुटाए गए, जबकि छोटे एवं मझोले उद्यमों (एसएमई) के 92 सार्वजनिक निर्गमों से 4,167 करोड़ रुपये मिले। इस तरह कुल 94,649 करोड़ रुपये की पूंजी जुटाई गई।
संशोधित व्यवस्था के तहत कंपनियां नए शेयर जारी करने के आकार को 50 प्रतिशत तक बढ़ा या घटा सकती हैं। हालांकि, इसके लिए जरूरी है कि निर्गम के मुख्य उद्देश्यों में कोई बदलाव न हो और निर्धारित अनुपालन शर्तें पूरी की जाएं।
भाषा योगेश अजय
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