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दिल्ली : बस की टक्कर से ट्रक चालक की मौत, परिवार को 25.25 लाख रुपये का मुआवजा

नयी दिल्ली, 13 अक्टूबर (भाषा) दिल्ली के मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने 2022 में सड़क किनारे ट्रक का पंक्चर ठीक करते समय बस की टक्कर से जान गंवाने वाले चालक के परिवार को 25.25 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है।

पीठासीन अधिकारी विक्रम ने मृत ट्रक चालक के परिवार की ओर से दायर मुआवजा याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि बस चालक की तेज और लापरवाही से वाहन चलाने के कारण दुर्घटना हुई थी।

अधिकरण ने 10 अक्टूबर के अपने आदेश में कहा, ‘‘यह माना जाता है कि दुर्घटना के लिए जिम्मेदार वाहन के चालक की लापरवाही स्पष्ट रूप से दिखाई देती है और वह न केवल इस दुर्घटना, बल्कि इसके बाद हुई सभी घटनाओं के लिए भी जिम्मेदार था।’’

अधिकरण ने उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपीएसआरटीसी) को 23 नवंबर 2023 से यानी मुआवजे की याचिका दायर करने की तारीख से मुआवजा राशि के भुगतान तक 7.5 प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ 25.25 लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया।

आदेश के अनुसार, यह दुर्घटना 28 अप्रैल 2022 को उत्तम शुगर मिल के पास हुई थी। उस्मान ने ट्रक का पंक्चर ठीक करने के लिए उसे सड़क किनारे खड़ा किया था।

इसी दौरान सुमित बालियान द्वारा चलाई जा रही एक बस ने उन्हें टक्कर मार दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें रुड़की के एक अस्पताल ले जाया गया और बाद में मुजफ्फरनगर के सरकारी अस्पताल भेजा गया, जहां पहुंचने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

अधिकरण ने प्रत्यक्षदर्शी संदीप की गवाही पर भरोसा किया। संदीप दुर्घटनास्थल के पास टायर पंक्चर ठीक करने की दुकान चलाता था। उसने बताया कि उसने उस्मान को टायर ठीक करते समय बस से टक्कर लगते हुए देखा था।

अधिकरण ने कहा कि बस चालक ने अपने हलफनामे में यह स्वीकार किया था कि उस्मान (मृत व्यक्ति) ट्रक का पंक्चर ठीक कर रहा था। यह स्वीकारोक्ति बचाव पक्ष के उस तर्क के विपरीत थी कि दुर्घटना ट्रक चालक की लापरवाही के कारण हुई।

अधिकरण ने उत्तर प्रदेश में कुशल श्रमिकों के लिए निर्धारित न्यूनतम मजदूरी के आधार पर मृतक की मासिक आय 11,743 रुपये आंकी और विभिन्न मदों के तहत कुल 25.25 लाख रुपये का मुआवजा निर्धारित किया।

अधिकरण ने मुआवजे के भुगतान के लिए यूपीएसआरटीसी को जिम्मेदार ठहराया, क्योंकि दुर्घटना में शामिल बस का स्वामित्व और संचालन निगम के पास था तथा दुर्घटना की तारीख पर वाहन को कवर करने वाली कोई बीमा पॉलिसी रिकॉर्ड में नहीं थी।

अधिकरण ने निगम को 30 दिन के भीतर मुआवजे की राशि जमा करने का निर्देश दिया। ऐसा नहीं करने पर उसे देरी की अवधि के लिए 10 प्रतिशत सालाना ब्याज देना होगा।

भाषा रविकांत दिलीप

दिलीप