नयी दिल्ली, 13 अक्टूबर (भाषा) पराली जलाने का मौसम अपने चरम पर पहुंचने से पहले केंद्र ने मंगलवार को मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) की सरकारों से पराली जलाने के मामलों पर रोक लगाने के लिए ‘मिशन मोड’ में काम करने को कहा।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में हुई एक उच्चस्तरीय अंतर-मंत्रालयी बैठक में राज्यों के कृषि मंत्रियों और अधिकारियों के साथ पराली प्रबंधन की समीक्षा की गई।
दोनों मंत्रियों ने कहा, ‘‘मौजूदा फसल की कटाई और रबी फसल की बुवाई के बीच बहुत कम समय बचा है। इसलिए प्रशासनिक तंत्र को कागजी कार्रवाई से आगे बढ़कर युद्धस्तर पर सीधे जमीन पर काम करना चाहिए।’’
कृषि मंत्रालय के बयान के अनुसार, राज्यों से जिलाधिकारियों के साथ तत्काल बैठकें करने और कड़ी निगरानी के साथ व्यावहारिक समाधान सुनिश्चित करने को कहा गया है।
चौहान ने 15 सितंबर से 12 अक्टूबर तक के आंकड़ों की समीक्षा करते हुए कहा कि पिछले वर्ष की तुलना में पराली जलाने के मामलों में हरियाणा में 53.3 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश में करीब 32 प्रतिशत की उल्लेखनीय कमी आई है। पंजाब में भी ऐसे मामलों में गिरावट दर्ज की गई।
हालांकि, उन्होंने मध्य प्रदेश में पराली जलाने के मामले 55 से बढ़कर 277 होने (452 प्रतिशत वृद्धि) और राजस्थान में 20 से बढ़कर 60 होने (200 प्रतिशत वृद्धि) को ‘‘बेहद चिंताजनक’’ बताया।
उन्होंने दोनों राज्यों को प्रभावित जिलों और गांवों की पहचान कर तत्काल विशेष कार्ययोजना लागू करने का निर्देश दिया।
चौहान ने कहा कि अभी फसल की कटाई का बड़ा हिस्सा बाकी है, इसलिए कम घटनाओं वाले राज्यों को भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए।
धान की कटाई और गेहूं की बुवाई के बीच किसानों को केवल 20 से 25 दिन मिलते हैं। ऐसे में खेत साफ करने के लिए पराली जलाना सबसे तेज और सस्ता तरीका बना हुआ है, हालांकि, इससे मिट्टी के पोषक तत्वों और जीवों को नुकसान पहुंचता है तथा दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण बढ़ता है।
पराली जलाने की रोकथाम की असली परीक्षा अक्टूबर के मध्य से नवंबर के मध्य तक होगी, जब फसल की कटाई और गेहूं की बुवाई का समय एक साथ पड़ेगा।
चौहान ने कहा, ‘‘किसानों से केवल पराली नहीं जलाने के लिए कहना पर्याप्त नहीं है। हमें उन्हें आसान, सुलभ और किफायती विकल्प उपलब्ध कराने होंगे।’’
उन्होंने कहा कि पराली को मिट्टी में मिलाने से वह जैविक खाद बन जाती है, जबकि खेतों से हटाई गई पराली के जरिये किसान जैव-सीएनजी, जैव-एथनॉल, बिजली उत्पादन और पशु चारे के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं।
केंद्र अबतक राज्यों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए तीन लाख 54 हजार से अधिक मशीनें उपलब्ध करा चुका है। इनमें चालू वित्त वर्ष में दी गई 26,109 नई मशीनें भी शामिल हैं।
हालांकि, केंद्र के एक सर्वेक्षण में पाया गया कि पंजाब में करीब 40 प्रतिशत और हरियाणा में 48 प्रतिशत पुरानी मशीनें इस्तेमाल नहीं हो रही हैं या काम नहीं कर रही हैं।
चौहान ने नई मशीनें वितरित करने के साथ पुरानी मशीनों की तत्काल मरम्मत कराने का निर्देश दिया।
केंद्र ने वर्ष 2018-19 से वर्ष 2025-26 के बीच फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत राज्यों को 4,266.47 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इसमें पंजाब को 2,056.50 करोड़ रुपये, हरियाणा को 1,171.71 करोड़ रुपये, उत्तर प्रदेश को 868.67 करोड़ रुपये और मध्य प्रदेश को 59 करोड़ रुपये दिए गए हैं।
भाषा राजेश राजेश अजय
अजय