लखनऊ, 13 अक्टूबर (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने प्रदेश के चार सरकारी मेडिकल कॉलेज में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को एमबीबीएस पाठ्यक्रम में दिए गए दाखिलों को लेकर राज्य सरकार से विस्तृत ब्यौरा मांगा है।
अदालत ने सरकार से पूछा कि 16 सितंबर 2026 तक आरक्षित वर्ग के कितने अभ्यर्थियों को प्रवेश दिया गया और इसके बाद कितने अभ्यर्थियों के दाखिले हुए, इसकी जानकारी दें। मामले की अगली सुनवाई बुधवार को होगी।
न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने मंगलवार को विशेष अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।
पीठ ने पहले गौर किया था कि सरकार ने पिछले साल अंबेडकर नगर, कन्नौज, सहारनपुर और जालौन के चार मेडिकल कॉलेजों में 2026-27 शैक्षणिक सत्र से ‘उत्तर प्रदेश शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण) अधिनियम, 2006’ के प्रावधानों को लागू करने का वादा किया था। हालांकि, पिछली सुनवाई में अदालत ने पाया कि तय आरक्षण सीमा से ज्यादा प्रवेश दिए जा रहे थे।
मंगलवार को अदालत को बताया गया कि संबंधित रिट याचिका में पीठ द्वारा 16 सितंबर, 2026 को अंतरिम आदेश पारित किए जाने के बाद ‘उत्तर प्रदेश शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण) अधिनियम, 2006’ के तहत तय आरक्षण प्रतिशत से ज्यादा किसी भी आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार को इन चार कॉलेजों में प्रवेश नहीं दिया गया है।
इस मामले से जुड़े चिकित्सा शिक्षा और समाज कल्याण विभागों द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों को अपने पास रखते हुए पीठ ने चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव वी. हेकाली झिमोमी, चिकित्सा शिक्षा की महानिदेशक नेहा शर्मा और समाज कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव अनुराग यादव को बुधवार को फिर से अदालत में मौजूद रहने का निर्देश दिया। ये अधिकारी मंगलवार को भी अदालत में मौजूद थे।
भाषा सं आनन्द सुरभि
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