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केरलम सरकार ने देश का पहला वृद्धजन देखभाल विधेयक पेश किया

तिरुवनंतपुरम, 13 अक्टूबर (भाषा) केरलम मंगलवार को वरिष्ठ नागरिकों को दुर्व्यवहार और शोषण से बचाने, वृद्ध देखभाल केंद्रों को विनियमित करने तथा स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा तक उनकी बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने के लिए व्यापक विधेयक पेश करने वाला देश का पहला राज्य बन गया।

मुख्यमंत्री वी डी सतीशन ने वृद्धों की सुरक्षा और देखभाल सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कानूनी ढांचा बनाने के लिए ‘केरलम वरिष्ठ नागरिक (देखभाल और अधिकारों का संरक्षण) विधेयक, 2026’ विधानसभा में पेश किया।

उन्होंने विधेयक पेश करते हुए कहा कि यदि यह पारित हो जाता है, तो केरलम वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए इस तरह का व्यापक कानून लाने वाला देश का पहला राज्य बन जाएगा।

सतीशन ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘यह भारत में अपनी तरह का पहला विधेयक है और यूडीएफ सरकार ने अपना वादा पूरा किया है।’’

इससे पहले, विधानसभा में सतीशन ने कहा कि विधेयक में वरिष्ठ नागरिक के साथ परिवार के किसी सदस्य, रिश्तेदार, कानूनी उत्तराधिकारी, देखभाल केंद्र के प्रभारी, उसके कर्मचारी या देखभाल करने वाले व्यक्ति द्वारा शारीरिक या मानसिक दुर्व्यवहार अथवा क्रूरता किए जाने पर तीन साल तक कैद और 50 हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव है।

सतीशन ने कहा कि उन्हें इस विधेयक को पेश करते हुए बेहद गर्व हो रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि कानून बनने के बाद केरलम वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा के मामले में दुनिया के लिए एक आदर्श बनेगा।

उन्होंने कहा, ‘‘किसी को भी यह महसूस नहीं होना चाहिए कि वह अकेला या उपेक्षित है। उनकी सुरक्षा उनका अधिकार है।’’ उन्होंने जोर देकर कहा कि कोई समाज अपने बुजुर्गों के साथ कैसा व्यवहार करता है, इससे यह निर्धारित होता है कि वह कितना सभ्य है।

सतीशन ने पिछले सप्ताह ‘पीटीआई वीडियो’ को दिए साक्षात्कार में कहा था कि बदलती जनसांख्यिकीय परिस्थितियों, जीवन प्रत्याशा बढ़ने और कुछ परिवारों में वरिष्ठ नागरिकों की उपेक्षा की चिंताओं के बीच इस विधेयक का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बुजुर्गों को जरूरी देखभाल और सहायता मिले।

विधेयक पेश करते हुए सतीशन ने रेमंड कंपनी के पूर्व अध्यक्ष विजयपत सिंघानिया की आत्मकथा का उल्लेख किया। इसमें सिंघानिया ने बताया है कि कैसे उन्होंने अपनी संपत्ति गंवा दी और जीवन के अंतिम वर्षों में उन्हें एक शयन कक्ष वाले फ्लैट में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा, क्योंकि मुंबई के प्रमुख इलाकों में स्थित अपने किसी भी आलीशान अपार्टमेंट में रहना उनके लिए तब आर्थिक रूप से संभव नहीं रह गया था।

बुजुर्ग माता-पिता को उनके बच्चों द्वारा छोड़ दिए जाने के मामलों का जिक्र करते हुए सतीशन ने सिंघानिया की आत्मकथा ‘एन इनकंप्लीट लाइफ’ का हवाला दिया। इस पुस्तक में उनके शुरुआती जीवन, रेमंड समूह का नेतृत्व करने, विमानन क्षेत्र में उनकी उपलब्धियों और जीवन के बाद के वर्षों में उनको हुए नुकसान का वर्णन है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंघानिया कभी भारत के प्रमुख उद्योगपतियों में शामिल थे और उनकी संपत्ति दो हजार से तीन हजार करोड़ रुपये के बीच थी।

सतीशन ने उन्हें ‘कपड़ा कारोबार का बादशाह’ बताते हुए कहा कि वह विमानन के प्रति जुनूनी थे और उन्होंने दुनिया में सबसे लंबी दूरी तक विमान उड़ाया था।

सिंघानिया ने वर्ष 2000 में रेमंड समूह की कमान अपने बेटे गौतम सिंघानिया को सौंप दी थी, लेकिन वह सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे। इस साल 28 मार्च को मुंबई में 87 वर्ष की आयु में इस दिग्गज उद्योगपति का निधन हो गया था।

भाषा संतोष अविनाश

अविनाश