नयी दिल्ली, 13 अक्टूबर (भाषा) विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ने मंगलवार को ‘वोट चोरी’ के मामले पर एकजुट होकर आगे बढ़ने का संकल्प लिया और कहा कि देश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बहाली तक ‘राजनीतिक और जन प्रतिरोध’ जारी रहेगा तथा सभी जिम्मेदार लोगों को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा।
उन्होंने ‘जंतर-मंतर’ को प्रदर्शन स्थल के रूप में गैर-अधिसूचित किए जाने के सरकार के कदम की निंदा की और कहा कि इसे फिर से आंदोलनकारियों के स्थान के रूप में बहाल किया जाएगा।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा उनके आवास ‘5 सुनहरी बाग रोड’ पर विपक्षी नेताओं के लिए आयोजित चाय पार्टी में जंतर-मंतर के विषय और ‘वोट चोरी’ पर आगे की रणनीति को लेकर चर्चा की गई।
बैठक के बाद सभी विपक्षी दलों के नेताओं ने संवाददाताओं से कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाया जाना, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को रद्द करना और चुनाव प्रणाली को दुरुस्त करना जरूरी है।
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष गांधी ने कहा, ‘‘हम सभी यहां एकजुट होकर, एक साथ खड़े हैं। जैसा कि मैंने कल कहा था, यहां कोई अलग-अलग या समानांतर विरोध प्रदर्शन नहीं हो रहे हैं। यह एक ही विरोध प्रदर्शन है और इस विरोध प्रदर्शन का एक ही उद्देश्य है और वह है भारत में लोकतंत्र की बहाली।’’
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘इस देश में लोकतंत्र को नष्ट कर दिया गया है। चुनावी व्यवस्था को नष्ट कर दिया गया है। संविधान को फाड़कर फेंक दिया गया है।’’
गांधी का कहना था, ‘‘हम सभी मिलकर इस देश में लोकतांत्रिक शासन, वास्तविक लोकतांत्रिक शासन को बहाल करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।’’
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं होने से जुड़े मुद्दे का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का एक माध्यम जंतर-मंतर था और अब सरकार ने यह तय कर लिया है कि लोकतांत्रिक भावनाओं को व्यक्त करने के लिए जंतर-मंतर का इस्तेमाल अब नहीं किया जा सकता। खैर, हम इस सोच को चुनौती देने जा रहे हैं। सरकार के लिए यह तय कर देना इतना आसान नहीं होगा कि भारत के लोग अपनी आवाज़ के लिए संघर्ष नहीं कर सकते।’’
गांधी ने इस बात पर जोर दिया कि जिन लोगों ने यह किया है, उन्हें यह समझने की जरूरत है कि उनके चारों ओर घेरा कसता जा रहा है तथा ऐसा नहीं होने वाला कि आप भारत के संविधान को नष्ट कर दें और आसानी से बच निकलें।’’
उन्होंने सोमवार को हुए विपक्ष के प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘कल आपने जो देखा, वह यहां खड़े राजनीतिक दलों की अभिव्यक्ति मात्र नहीं थी, बल्कि वह भारत के लोगों की अभिव्यक्ति थी। हम वहां मौजूद थे, लेकिन कल जो कुछ हुआ, वह इस देश के आम नागरिकों, गैर-राजनीतिक नागरिकों की भागीदारी और उनकी भावनाओं की अभिव्यक्ति के बिना संभव नहीं था।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए, एक गठबंधन के रूप में सबसे पहले हम दिल्ली के लोगों और भारत के उन सभी लोगों को धन्यवाद देना चाहते हैं, जो हमारे साथ खड़े हुए और जो कुछ किया जा रहा है, उसके खिलाफ हमारे साथ आवाज़ उठाई।’’
राहुल गांधी ने कहा कि यह लड़ाई विपक्षी दलों के बारे में नहीं है, बल्कि यह भारत के लोगों और उनके भविष्य के बारे में है।
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा, ‘‘हम आपसे (जनता से) स्नेह करते हैं और आपका सम्मान करते हैं, इसलिए हम इस देश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बहाल करने के लिए अंत तक संघर्ष करेंगे।’’
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और ज्ञानेश कुमार का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री इस पूरे मामले में मुख्य सूत्रधार है और गृह मंत्री ने इसका क्रियान्वयन किया है।
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने ज्ञानेश कुमार के साथ ही ‘‘देहरादून में छिपी हुई एक महिला’’ का जिक्र भी किया, हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया। संभवत: उनका इशारा निर्वाचन आयोग की एक अधिकारी की तरफ था।
गांधी ने कहा, ‘‘यह हमारी प्रतिबद्धता है कि जिन लोगों ने यह सब किया है, उन्हें न्याय के कटघरे में लाया जाएगा।’’
उनके आवास पर आयोजित कार्यक्रम में कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश, प्रियंका गांधी वाद्रा, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव एम. ए. बेबी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के महासचिव डी. राजा, समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद हरेंद्र मलिक और आनंद भदौरिया, तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोइत्रा और सागरिका घोष समेत कई विपक्षी नेता मौजूद रहे।
बैठक में सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण भी शामिल हुए।
इस बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने सोमवार को विपक्ष के प्रदर्शन में लोगों की भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि दिल्ली में संभवत: इतनी बड़ी संख्या में लोग पहले कभी सड़क पर नहीं उतरे होंगे।
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर लोकतंत्र को कमजोर करने का प्रयास किया है।
यादव ने कहा, ‘‘लोकतंत्र को बचाने के लिए हमें जो भी कुर्बानी देनी होगी, हम सब मिलकर देंगे। इस देश की संवैधानिक संस्थाओं को ‘हाईजैक’ करने का प्रयास किया जा रहा है।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने ‘‘कठपुतली की तरह’’ काम किया है। यादव ने कहा कि विपक्ष इस लड़ाई को जारी रखेगा और सभी दल मिलकर लड़ेंगे।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की नेता सुप्रिया सुले ने आरोप लगाया कि सरकार संविधान को कमजोर करने की ‘‘बहुत बड़ी भूल’’ कर रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष ‘‘अन्याय और अत्याचार’’ के खिलाफ एकजुट है तथा आंदोलन जारी रहेगा।
समाजवादी पार्टी के नेता हरेंद्र मलिक ने कहा कि विपक्ष अपनी एकता बनाए रखेगा और ‘‘आखिरी दम तक’’ संघर्ष करेगा।
माकपा महासचिव एम. ए. बेबी ने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त और ‘‘वोट चोरी’’ के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा।
तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष ने आरोप लगाया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त के नेतृत्व में निर्वाचन आयोग निष्पक्ष चुनाव की व्यवस्था को कमजोर कर रहा है।
उन्होंने कहा कि विपक्ष मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाए जाने और कथित रूप से जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होने तक अपना आंदोलन जारी रखेगा।
शिवसेना (उबाठा) के नेता संजय राउत ने भी मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि उन्होंने एक ‘‘माफिया’’ की तरह पूरी व्यवस्था का ‘‘अपराधीकरण’’ किया है।
राउत ने कहा, ‘‘राहुल गांधी जी के नेतृत्व में संघर्ष जारी रहेगा और पूरे देश में होगा। हम एक साथ हैं और एक साथ रहेंगे।’’
वाम छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने भाजपा पर संविधान और लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया और कहा कि आने वाले दिनों में संघर्ष जारी रहेगा।
विपक्षी दलों ने सोमवार को ज्ञानेश कुमार के खिलाफ उच्चतम न्यायालय की ओर मार्च निकाला था। विपक्षी नेताओं ने इस मामले में शीर्ष अदालत में एक याचिका भी दायर की है।
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