नयी दिल्ली, 13 अक्टूबर (भाषा) प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी के मिश्रा ने मंगलवार को कहा कि साक्ष्य-आधारित नीतियां बनाने और 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए एक मजबूत सांख्यिकीय व्यवस्था जरूरी है।
नयी दिल्ली में सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) की ओर से आयोजित राज्य योजना, वित्त और सूचना प्रौद्योगिकी सचिवों के सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मिश्रा ने यह बात कही।
मंत्रालय के बयान के अनुसार, विश्वसनीय आंकड़ों, आंकड़ों में एकरूपता और प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से सुशासन के महत्व पर जोर देते हुए मिश्रा ने कहा कि साक्ष्य-आधारित नीतियां बनाने और 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए मजबूत सांख्यिकीय व्यवस्था जरूरी है।
मिश्रा ने कहा कि भारत की विकास यात्रा में सांख्यिकी, आंकड़े, प्रौद्योगिकी, योजना और शासन तेजी से एक-दूसरे से जुड़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि एक मजबूत सांख्यिकीय व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जो सरकारों को राज्यों और जिलों में विकास की प्रगति मापने, नीतियों के परिणामों का आकलन करने, कमियों की पहचान करने और यह सुनिश्चित करने में सक्षम बनाए कि सार्वजनिक संसाधनों का इस्तेमाल अपेक्षित नतीजे हासिल करने के लिए हो रहा है।
हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि प्रौद्योगिकी खराब गुणवत्ता वाले आंकड़ों की भरपाई नहीं कर सकती। आंकड़े तेजी से जुटाने के प्रयास में गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए और आंकड़ों तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित करते समय उनकी गोपनीयता भी बरकरार रहनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि 2047 तक भारत के विकास का मार्गदर्शन करने वाली भरोसेमंद, पारदर्शी और परस्पर अनुकूल सांख्यिकी व्यवस्था तैयार करने के लिए सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय, राज्य सांख्यिकी कार्यालयों, वित्त एवं योजना विभागों, नीति आयोग और शैक्षणिक संस्थानों को मिलकर काम करना चाहिए।
भाषा योगेश अजय
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