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अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी से ग्रिड की स्थिरता बनाए रखना संभव: सीईए चेयरमैन प्रसाद

नयी दिल्ली, 13 अक्टूबर (भाषा) केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) ने मंगलवार को कहा कि देश के ऊर्जा स्रोतों में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ने के साथ बिजली ग्रिड की स्थिरता और शॉर्ट-सर्किट क्षमता से जुड़ी समस्याओं का समाधान उपयुक्त इन्वर्टर प्रौद्योगिकी और समय पर नई प्रौद्योगिकी अपनाकर किया जा सकता है।

सीईए के चेयरमैन घनश्याम प्रसाद ने उद्योग मंडल इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईसीसी) के 20वें भारत ऊर्जा शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि भारत अपनी बढ़ती बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए एक या दो ऊर्जा स्रोतों पर निर्भर नहीं रह सकता। देश को पारंपरिक बिजली उत्पादन, नवीकरणीय ऊर्जा और भंडारण जैसे पूरक संसाधनों का संतुलित मिश्रण अपनाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि बिजली की भरोसेमंद और निरंतर आपूर्ति बनाए रखने के लिए आधारभूत बिजली उत्पादन महत्वपूर्ण बना हुआ है, वहीं नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में वृद्धि भी जारी रहनी चाहिए।

आईसीसी ने एक बयान में सीईए चेयरमैन के हवाले से कहा कि हालांकि, नवीकरणीय ऊर्जा की बढ़ती हिस्सेदारी से ग्रिड प्रबंधन की नई चुनौतियां भी पैदा हो रही हैं। इनमें नवीकरणीय ऊर्जा की अधिक हिस्सेदारी वाले क्षेत्रों में शॉर्ट-सर्किट क्षमता और ग्रिड की स्थिरता से जुड़ी चिंताएं शामिल हैं।

प्रसाद ने कहा, ‘‘इन समस्याओं के समाधान के लिए उपयुक्त इन्वर्टर प्रौद्योगिकी, हार्मोनिक फिल्टर, बिजली की शक्ति का संतुलन बनाए रखने वाली प्रणालियों और सिंक्रोनस कंडेनसर की जरूरत होगी। इसके लिए समय पर नई प्रौद्योगिकी अपनाने और पूरी बिजली प्रणाली के स्तर पर योजना बनाने की भी आवश्यकता है।’’

एनटीपीसी के चेयरमैन गुरदीप सिंह ने कहा कि बिजली क्षेत्र के लिए ऊर्जा सुरक्षा एक प्रमुख विचार बन गई है। आर्थिक वृद्धि, मौसम में बदलाव और कृत्रिम मेधा (एआई) तथा डेटा सेंटर जैसी उभरती प्रौद्योगिकियां बिजली की मांग के बदलते स्वरूप में योगदान दे रही हैं।

उन्होंने कहा कि इस बहस को तापीय और नवीकरणीय ऊर्जा के बीच दो विकल्पों तक सीमित रखने के बजाय इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि जरूरत के समय उचित कीमत पर बिजली उपलब्ध हो सके।

सिंह ने कहा कि बिजली उत्पादन में कोयले की महत्वपूर्ण भूमिका बनी हुई है। ऐसे में भरोसेमंद पारंपरिक बिजली उत्पादन और गैर-जीवाश्म ईंधन (स्वच्छ ईंधन) आधारित क्षमता के लगातार विस्तार के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

भाषा रमण अजय

अजय