नयी दिल्ली, 13 अक्टूबर (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने सीबीआई द्वारा दर्ज किए गए पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) से जुड़े 247 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी मामले में एक आरोपी के खिलाफ जारी 'लुक-आउट सर्कुलर' (एलओसी) को रद्द करते हुए कहा कि किसी आरोप की गंभीरता ही सर्कुलर के निरंतर संचालन का एकमात्र निर्धारक नहीं हो सकती।
एलओसी एक प्रशासनिक अलर्ट है, जिसका इस्तेमाल भारत में कानून प्रवर्तन एजेंसियां अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर किसी व्यक्ति की आवाजाही पर नजर रखने या उसके विदेश जाने पर रोक लगाने के लिए करती हैं।
राउज एवेन्यू अदालत के विशेष न्यायाधीश दिनेश कुमार आरोपी आकाश गुप्ता की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे जिसमें कहा गया कि वह अपने बेटे का एक शैक्षणिक संस्थान में दाखिला कराने के लिए ऑस्ट्रेलिया जा रहे थे, तभी बेंगलुरु हवाई अड्डे पर आव्रजन काउंटर पर उन्हें रोक दिया गया। इसी दौरान उन्हें पहली बार पता चला कि उनके खिलाफ एलओसी जारी किया गया है।
याचिका में एलओसी को रद्द करने का अनुरोध करते हुए कहा गया कि अदालत ने पहले गुप्ता को विदेश यात्रा की अनुमति दी थी, जिसके बाद उन्होंने सभी शर्तों का पालन किया और समय पर लौट आए। इसमें कहा गया कि उन्होंने पूरी जांच में सहयोग भी किया।
सात अक्टूबर के एक आदेश में अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी मामले में अपनी अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर चुकी है और जांच के दौरान गुप्ता को गिरफ्तार नहीं किया गया था।
अदालत ने कहा, ‘‘इसलिए, जांच एजेंसी यह बताने के लिए बाध्य है कि अब उनकी विदेश यात्रा पर लगातार प्रतिबंध लगाना क्यों आवश्यक है।’’
उसने कहा, ‘‘जांच एजेंसी की केवल एक अस्पष्ट धारणा के आधार पर याचिकाकर्ता की स्वतंत्रता पर अंकुश नहीं लगाया जाना चाहिए।’’
भाषा
प्रचेता नरेश
नरेश