नयी दिल्ली, 13 अक्टूबर (भाषा) विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निर्वाचन आयोग के खिलाफ विपक्ष के प्रदर्शन की तुलना भगवान शिव के तांडव से करके न्यायपालिका पर दबाव डालने की कोशिश करने और हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने का मंगलवार को आरोप लगाया तथा उनसे सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।
ये टिप्पणियां विपक्षी नेताओं, कार्यकर्ताओं और नागरिक संगठन के सदस्यों द्वारा कथित ‘वोट चोरी’ और चुनाव में अनियमितताओं के आरोपों को लेकर उच्चतम न्यायालय तक ‘लोकतंत्र के लिए मार्च’ निकाले जाने के एक दिन बाद आई हैं।
नेताओं ने भारी बैरिकेडिंग वाले मार्ग से मार्च निकाला और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) तथा कथित चुनावी अनियमितताओं के खिलाफ संयुक्त याचिका दायर की।
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए गांधी ने कहा कि पहले भी विरोध होता रहा है, लेकिन वह प्रदर्शन के रूप में सड़कों पर नहीं उतरा था। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई कई दिनों या वर्षों तक जारी रह सकती है। उन्होंने लोगों से प्रदर्शन जारी रखने की अपील करते हुए इसे ऐसा ‘तांडव’ बताया, जिसके लिए किसी योजना की जरूरत नहीं होती।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष गांधी ने कहा, ‘‘यह भगवान शिव के तांडव की तरह है और कोई भी शिव की ‘बारात’ में शामिल हो सकता है।’’
विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने इस तुलना को आपत्तिजनक बताया।
बंसल ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘बेशर्मी की हद देखिए। राहुल गांधी अपने अराजक राजनीतिक आंदोलन को भगवान शिव का तांडव और शिव की बारात बता रहे हैं।’’
उन्होंने कहा कि भगवान शिव के तांडव की तुलना राजनीतिक प्रदर्शनों से नहीं की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘...महादेव का तांडव कोई राजनीतिक भीड़ नहीं है। जब यह होता है, तो न आप बचेंगे और न ही आपकी अराजक भीड़। भगवान शिव की बारात लाखों हिंदुओं की आस्था और भक्ति का पवित्र प्रतीक है!’’
बंसल ने गांधी और कांग्रेस पर राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक भावनाओं का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि शिव के नाम के ‘दुरुपयोग’ पर हिंदू जवाब देंगे। उन्होंने कहा, ‘‘अपने तुच्छ राजनीतिक फायदे के लिए महादेव के नाम का दुरुपयोग करने का दंड हिंदू समाज आपको जरूर देगा।’’
उन्होंने प्रधान न्यायाधीश से मिलने का अनुरोध ठुकराए जाने के बाद उच्चतम न्यायालय तक मार्च निकालने के लिए विपक्षी नेताओं की भी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम न्यायपालिका को डराने की कोशिश थी।
भाषा आशीष नरेश
नरेश