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उच्चतम न्यायालय ने एनएसईएल निपटान के खिलाफ एमएमटीसी की अपील खारिज की

नयी दिल्ली, 13 अक्टूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने अपीलीय न्यायाधिकरण एनसीएलएटी के आदेश को चुनौती देने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एमएमटीसी की अपील मंगलवार को खारिज कर दी। इस आदेश में 63 मून्स-समर्थित एनएसईएल और कारोबारियों के बीच 1,950 करोड़ रुपये के एकमुश्त निपटान को मंजूरी दी गई थी।

न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के 30 मार्च के फैसले के खिलाफ दायर एमएमटीसी की अपील खारिज कर दी।

एनसीएलटी की मुंबई पीठ ने 28 नवंबर, 2025 को नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड (एनएसईएल), उसकी प्रवर्तक कंपनी 63 मून्स और उन कारोबारियों के बीच एकमुश्त निपटान योजना को मंजूरी दी थी, जिनकी कुल बकाया राशि करीब 4,300 करोड़ रुपये थी।

एमएमटीसी ने इस निपटान योजना को एनसीएलएटी में चुनौती देते हुए कहा था कि यह जनहित के प्रतिकूल है और सार्वजनिक नीति के खिलाफ है।

सुनवाई के दौरान एनसीएलएटी ने कहा था कि राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के 11 नवंबर, 2025 के आदेश को वह पहले ही मंजूरी दे चुका है और उच्चतम न्यायालय ने भी नौ मार्च, 2026 को एक दीवानी अपील में इसकी पुष्टि की थी।

एनसीएलटी ने 17 सितंबर, 2025 के अपने आदेश में दर्ज किया था कि मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा और एमपीआईडी कानून के तहत सक्षम प्राधिकरण की ओर से पेश वकील ने प्रस्तावित योजना पर कोई आपत्ति नहीं जताई थी।

समझौता योजना के तहत कारोबारियों ने एनएसईएल और 63 मून्स के खिलाफ सभी कानूनी मामले वापस लेने पर सहमति जताई थी।

एनएसईएल कृषि जिंसों एवं धातुओं के इलेक्ट्रॉनिक कारोबार के लिए बनाया गया एक्सचेंज था। जुलाई, 2013 में उपभोक्ता मामलों के विभाग ने उसे सभी अनुबंधों का निपटान करने का निर्देश दिया था। इसके बाद भुगतान संकट पैदा हुआ और बकाया राशि 5,400 करोड़ रुपये से अधिक हो गई।

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय