नयी दिल्ली, 13 अक्टूबर (भाषा) अदाणी एंटरप्राइजेज और अमेरिका की विनिर्माण कंपनी जेबिल ने भारत में कृत्रिम मेधा (एआई) और डेटा सेंटर से जुड़े उपकरण बनाने के लिए संयुक्त उद्यम गठित करने को लेकर एक गैर-बाध्यकारी समझौता किया है। इस संयुक्त उद्यम में दोनों कंपनियों की बराबर-बराबर हिस्सेदारी होगी।
प्रस्तावित संयुक्त उद्यम में एआई रैक, सर्वर, भंडारण और नेटवर्किंग उपकरणों के साथ बिजली वितरण प्रणालियों, द्रव से ठंडा करने के उपकरणों और ट्रांसफॉर्मर का विनिर्माण एवं असेंबल किया जाएगा।
इसका उद्देश्य कई गीगावाट क्षमता वाला विनिर्माण मंच तैयार करना है, जो भारत और वैश्विक बाजारों के ग्राहकों की जरूरतें पूरी करेगा।
दोनों कंपनियों ने संयुक्त बयान में कहा कि यह समझौता अंतिम अनुबंधों, नियामकीय मंजूरियों और अन्य निर्धारित शर्तों पर निर्भर है।
यह समझौता जून में भारत में एआई और डेटा सेंटर उपकरण के विनिर्माण का परिवेश तैयार करने की दोनों कंपनियों की घोषणा के बाद हुआ है।
समझौता ज्ञापन (एमओयू) में भारत में कई गीगावाट क्षमता वाला एआई बुनियादी ढांचा विनिर्माण मंच तैयार करने के लिए जेबिल और अदाणी के बीच प्रस्तावित संयुक्त उद्यम की रूपरेखा तय की गई है। इसमें एआई रैक, सर्वर, नेटवर्किंग, बिजली और शीतल करने की प्रणालियों का विनिर्माण शामिल है।
संयुक्त उद्यम का लक्ष्य भारत में तेजी से बढ़ती डेटा सेंटर की मांग को पूरा करना है। उद्योग के अनुमान के अनुसार, क्लाउड कंप्यूटिंग के विस्तार, एआई के बढ़ते उपयोग और आंकड़ों को देश के भीतर रखने संबंधी जरूरतों के कारण भारत में डेटा सेंटर की क्षमता 2030 तक पांच से आठ गीगावाट तक पहुंचने का अनुमान है।
वहीं, बड़े पैमाने पर क्लाउड सेवाएं देने वाली कंपनियों की डेटा सेंटर, क्लाउड और एआई क्षेत्र में 50 अरब डॉलर से अधिक के निवेश की योजनाएं हैं।
कंपनियों का अनुमान है कि कृत्रिम मेधा के लिए कंप्यूटिंग बुनियादी ढांचे में निवेश तेजी से बढ़ने के कारण अगले सात वर्षों में वैश्विक बाजार में 3,000 अरब डॉलर से अधिक के अवसर उपलब्ध होंगे।
स्थापित होने के बाद संयुक्त उद्यम दुनिया की प्रमुख एआई क्षेत्र की कंपनियों को सेवाएं देगा।
इस संयुक्त उद्यम से अदाणी समूह ऊर्जा आपूर्ति और डेटा सेंटर विकास से आगे बढ़कर एआई कंप्यूटिंग में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों के विनिर्माण क्षेत्र में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाएगा।
समूह ने 2035 तक हरित ऊर्जा से संचालित पांच गीगावाट क्षमता वाले डेटा सेंटर विकसित करने के लिए 100 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है।
कंपनियों ने कहा कि प्रस्तावित निवेश भारत में घरेलू डिजिटल बुनियादी ढांचे के विस्तार और वैश्विक एआई मांग को पूरा करने के लिए देश को विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने के लक्ष्य के अनुरूप है।
अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने कहा कि प्रस्तावित संयुक्त उद्यम से समूह को कृत्रिम मेधा (एआई) की मूल्य श्रृंखला में और आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।
अदाणी ने कहा, ‘‘कृत्रिम मेधा (एआई) क्रांति के लिए केवल एल्गोरिदम में बड़ी सफलताएं ही पर्याप्त नहीं होंगी। इसके लिए एक नए औद्योगिक ढांचे की जरूरत होगी, जिसमें ऊर्जा, विशाल क्षमता वाला बुनियादी ढांचा, आधुनिक कंप्यूटिंग और सटीक विनिर्माण एक साथ मिलकर ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था को गति देंगे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘... हम एआई बुनियादी ढांचे को ऊर्जा उपलब्ध कराने और उसकी मेजबानी करने से आगे बढ़कर उन महत्वपूर्ण प्रणालियों की इंजीनियरिंग और विनिर्माण करना चाहते हैं, जो कंप्यूटिंग की अगली पीढ़ी को आकार देंगी।”
अदाणी कहा, ‘‘जेबिल के साथ प्रस्तावित संयुक्त उद्यम इस दिशा में एक रणनीतिक कदम है। इसमें जेबिल की विश्वस्तरीय इंजीनियरिंग और विनिर्माण क्षमताओं को ऊर्जा, बुनियादी ढांचे और डेटा सेंटर के क्षेत्र में अदाणी की एकीकृत क्षमताओं के साथ जोड़ा जाएगा। इससे वैश्विक एआई अर्थव्यवस्था के भौतिक आधार को तैयार करने में मदद मिलेगी।’’
जेबिल के मुख्य कार्यपालक अधिकारी माइक दस्तूर ने कहा, ‘‘इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर भारत में बड़े पैमाने पर एआई बुनियादी ढांचा विनिर्माण मंच स्थापित करने के हमारे साझा प्रयासों की दिशा में अगला कदम है। हमारा मानना है कि घरेलू और वैश्विक एआई बुनियादी ढांचे की मांग के लिहाज से भारत का महत्व लगातार बढ़ेगा।’’
भाषा रमण अजय
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