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चमोली में वसुंधरा ताल हिमनद झील में पूर्व चेतावनी प्रणाली स्थापित

देहरादून, 13 अक्टूबर (भाषा) उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित वसुंधरा ताल में हिमनदीय झील के अचानक टूटने से आने वाली बाढ़ (ग्लॉफ) के खतरे की निगरानी और समय रहते चेतावनी देने के लिए पूर्व चेतावनी प्रणाली स्थापित की गई है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

पूर्व चेतावनी प्रणाली स्थापित करने के बाद लौटे वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों के दल का प्रदेश के आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने मंगलवार को स्वागत किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह प्रणाली उच्च हिमालयी क्षेत्रों में जोखिमों की निगरानी, समयबद्ध चेतावनी तथा संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार वैज्ञानिक संस्थानों के सहयोग से आपदा प्रबंधन में आधुनिक तकनीकों के उपयोग को निरंतर प्रोत्साहित कर रही है।

अधिकारियों ने कहा कि इस प्रणाली से हिमनद झील के जलस्तर, मौसम, बर्फ और भू-गतिविधियों की निगरानी में मदद मिलेगी।

उन्होंने बताया कि उच्च हिमालयी क्षेत्र की दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और चुनौतीपूर्ण मौसम के बीच दल द्वारा 38.50 मीटर गहरी झील एवं उसके आसपास विभिन्न अत्याधुनिक सेंसर स्थापित किए गए हैं। राज्य में पहली बार किसी हिमनद झील में इस प्रकार की पूर्व चेतावनी प्रणाली स्थापित किए जाने से हिमालयी क्षेत्रों में आपदा जोखिम की वैज्ञानिक निगरानी और मजबूती होगी।

दल को 29 सितंबर को प्रदेश के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।

आपदा प्रबंधन सचिव सुमन ने बताया कि उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) द्वारा राष्ट्रीय ग्लॉफ जोखिम न्यूनीकरण कार्यक्रम के तहत वसुंधरा ताल में पूर्व चेतावनी प्रणाली स्थापित करने का अभियान चलाया गया। अभियान में रुड़की स्थित केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई), देहरादून के वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों एवं तकनीकी विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उन्होंने कहा कि उच्च हिमालयी क्षेत्र की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में उपकरणों की स्थापना एक चुनौतीपूर्ण कार्य था, जिसे दल ने समर्पण, तकनीकी दक्षता और आपसी समन्वय से पूरा किया।

सुमन ने बताया कि यूएसडीएमए द्वारा अभियान के लिए आवश्यक समन्वय, लॉजिस्टिक सहायता तथा संचार उपकरण उपलब्ध कराए गए जबकि राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की भी इसमें भूमिका रही।

अधिकारियों के मुताबिक, प्रणाली के तहत लगाए गए सेंसर सामान्य परिस्थितियों में हर दो घंटे में आंकड़े सीबीआरआई और यूएसडीएमए में स्थापित डैशबोर्ड पर भेजेंगे। इन आंकड़ों की नियमित निगरानी की जाएगी। किसी आपात स्थिति में सेंसर निर्धारित दो घंटे के अंतराल का इंतजार किए बिना तत्काल आंकड़े भेजेंगे, जिससे संभावित असामान्य परिस्थितियों का समय रहते पता लगाने में मदद मिलेगी।

वसुंधरा ताल के उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित होने और वहां सामान्य मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं होने के कारण चेतावनी प्रणाली में इरिडियम उपग्रह संचार तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।

अधिकारियों के मुताबिक, अभियान दल ने वापसी से पहले डेटा संचार की कार्यप्रणाली का सत्यापन कर लिया है और सभी डाटा अपेक्षानुसार प्राप्त हो रहा है।

भाषा दीप्ति सुरभि

सुरभि

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